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फ़रवरी, 13, 2026
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जानकी जयंती 2026: इस पावन पर्व पर दान का विशेष महत्व

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Janki Jayanti 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जानकी जयंती का पावन पर्व माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दान-पुण्य और धर्म-कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस शुभ अवसर पर किया गया दान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से माता सीता की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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जानकी जयंती 2026: इस पावन पर्व पर दान का विशेष महत्व

जानकी जयंती, जिसे सीता नवमी के नाम से भी जाना जाता है, माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह दिन भगवान राम और माता सीता के आदर्श जीवन और पवित्रता का स्मरण कराता है। ज्योतिष शास्त्र और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशेष तिथि पर निष्ठापूर्वक दान करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

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जानकी जयंती 2026 पर करें इन वस्तुओं का दान

इस पवित्र दिन पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इन दानों से न केवल दानकर्ता को लाभ होता है, बल्कि समाज में सद्भाव और कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

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  • अन्न दान: जानकी जयंती पर अन्न का दान करना महादान माना गया है। गरीबों और जरूरतमंदों को अनाज, आटा, दाल या पका हुआ भोजन दान करने से माता अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
  • वस्त्र दान: इस दिन वस्त्रों का दान करना भी शुभ फलदायी होता है। विशेषकर महिलाओं और बच्चों को नए वस्त्र दान करने से माता सीता की कृपा मिलती है और जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है।
  • मिठाई और फल दान: जानकी जयंती के अवसर पर मंदिरों में या गरीबों को मिठाई और फलों का दान करना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • जल दान: गर्मी के मौसम में यदि जानकी जयंती पड़ती है, तो जल दान करना परम पुण्य का कार्य माना जाता है। प्याऊ लगवाना या लोगों को पानी पिलाना मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।
  • तिल और गुड़ दान: शनि और राहु के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए तिल और गुड़ का दान भी इस दिन लाभकारी माना गया है। यह दान स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि करता है।
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इन सभी दानों को श्रद्धा और सच्चे मन से करने पर ही उनका पूरा फल प्राप्त होता है। दान करते समय अपनी सामर्थ्य का ध्यान अवश्य रखें और दिखावे से बचें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

माता सीता का जीवन त्याग, सेवा और धर्मपरायणता का प्रतीक है। उनके जन्मोत्सव पर दान करके हम उनके आदर्शों का अनुसरण करते हैं। यह दिन हमें निस्वार्थ भाव से सेवा करने और दूसरों के प्रति दयालुता दिखाने की प्रेरणा देता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जानकी जयंती पर किया गया दान न सिर्फ वर्तमान जीवन को संवारता है, बल्कि जन्म-जन्मांतर के पापों का भी नाश करता है।

इस प्रकार, जानकी जयंती का पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता और आध्यात्मिकता का संगम है। इस दिन दान-धर्म का पालन कर हम अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।

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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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