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फ़रवरी, 13, 2026
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आज का शुभ योग: Pradosh Vrat के महत्व और पूजन विधि पर विशेष लेख

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Pradosh Vrat: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत के रूप में विशेष महत्व रखती है, और जब यह शनिवार को पड़े, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है, जिसका पूजन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

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आज का शुभ योग: Pradosh Vrat के महत्व और पूजन विधि पर विशेष लेख

वर्ष 2026 में 14 फरवरी, शनिवार के दिन, फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी पर एक अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है, जिसे शनि Pradosh Vrat के नाम से जाना जाता है। यह दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। ग्रहों की विशेष स्थिति और प्रदोष काल में की गई आराधना से साधक को जीवन में सुख-शांति, समृद्धि तथा समस्त कष्टों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। “आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।” इस पवित्र त्रयोदशी तिथि पर व्रत और पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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शनि Pradosh Vrat: जानिए क्या है इसका महत्व और लाभ

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

तिथिदिनप्रदोष काल आरंभ (लगभग)प्रदोष काल समाप्त (लगभग)
फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशीशनिवार, 14 फरवरी 2026शाम 05:50 बजेशाम 08:20 बजे
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शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव और शनिदेव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • प्रदोष काल में (सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पहले और डेढ़ घंटे बाद) पूजा आरंभ करें।
  • भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
  • शनिदेव को नीले फूल, काले तिल, सरसों का तेल और उड़द दाल चढ़ाएं।
  • शनि चालीसा और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • आरती कर प्रसाद वितरित करें।
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शनि प्रदोष व्रत का महत्व एवं कथा

शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव के साथ-साथ न्याय के देवता शनिदेव को भी प्रसन्न करने का अवसर प्रदान करता है। जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और शनिदेव की पूजा करता है, उसे शनि दोषों से मुक्ति मिलती है, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में कमी आती है, तथा धन, धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत निःसंतान दंपत्तियों के लिए संतान प्राप्ति का वरदान भी लाता है।

ॐ नमः शिवाय।

ॐ शं शनैश्चराय नमः।

महामृत्युंजय मंत्र:

‘‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥’’

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शनि प्रदोष के विशेष उपाय

शनि प्रदोष व्रत का पालन करने से शिव कृपा और शनिदेव की शांति एक साथ प्राप्त होती है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि लौकिक बाधाओं को दूर कर जीवन को सुखमय बनाता है। इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तिल, उड़द और सरसों के तेल का दान करने से शनिदेव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। “आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।” संध्याकाल में शिव मंदिर में दीपक जलाना और शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना भी बहुत फलदायी होता है। इस शुभ त्रयोदशी तिथि पर आप भी इन उपायों को अपनाकर भगवान शिव और शनिदेव की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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