



Electric Vehicles: ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली एक नई ट्रेड डील ने हलचल मचा दी है, खासकर उन भारतीय ग्राहकों के लिए जो लग्जरी कारें और हार्ले डेविडसन जैसी प्रीमियम बाइक खरीदने का सपना देखते हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा, लेकिन इसके कुछ अप्रत्याशित परिणाम भी सामने आए हैं।
Electric Vehicles पर बढ़ा आयात शुल्क: एलन मस्क को लगा ‘खेल’
इस नए व्यापारिक समझौते के तहत, अमेरिकी निर्मित हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिलें और लग्जरी कारें भारत में काफी सस्ती हो सकती हैं। यह उन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है जो इन ब्रांडों की गाड़ियों को पसंद करते हैं लेकिन ऊंची कीमतों के कारण खरीदने से झिझकते थे। वहीं, दूसरी ओर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस डील में इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्स छूट से बाहर रखा गया है, जो कई कंपनियों के लिए चिंता का विषय है।
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क, जो भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लाने की योजना बना रहे थे, उन्हें इस फैसले से करारा झटका लगा है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों पर उच्च आयात शुल्क अभी भी बरकरार रहेगा, जिससे उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी नहीं बन पाएंगी। मस्क भारत सरकार से लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स छूट की मांग कर रहे थे, ताकि टेस्ला की गाड़ियां भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील एक तरफ जहां अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को खोलेगी, वहीं दूसरी तरफ भारत में इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट के विकास को थोड़ा धीमा कर सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार भविष्य में इस नीति पर पुनर्विचार करती है या नहीं। लेटेस्ट कार और बाइक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 आपके लिए ऑटोमोबाइल जगत की हर खबर लाता है।
डील का विस्तृत प्रभाव और भारतीय बाजार
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत, कई अन्य अमेरिकी उत्पादों को भी भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्स छूट से बाहर रखने का फैसला एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य शायद घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को बढ़ावा देना है।
इस डील के बाद भारतीय लग्जरी कार बाजार और प्रीमियम बाइक सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। ग्राहकों को बेहतरीन विकल्पों और संभावित रूप से बेहतर डील्स का फायदा मिलेगा। दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए, कंपनियों को अब स्थानीयकरण और लागत कम करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे, ताकि वे बिना टैक्स छूट के भी भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बना सकें। यह एक जटिल स्थिति है जिसका दीर्घकालिक प्रभाव ऑटोमोबाइल उद्योग पर महत्वपूर्ण होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


