
मोहन भागवत न्यूज़: कभी विचार की अग्नि प्रज्वलित कर, कभी राष्ट्रवाद की लौ को तीव्र कर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का शताब्दी समारोह एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है। इस मंच से संघ प्रमुख ने देश के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी, जिसकी गूँज राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस तक सुनाई दे रही है।
मोहन भागवत का समान नागरिक संहिता पर चिंतन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को समान नागरिक संहिता (UCC) पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कानून को बनाते समय सभी वर्गों को विश्वास में लेना अनिवार्य है। उनका मानना है कि समान नागरिक संहिता किसी भी प्रकार के मतभेद को जन्म नहीं देना चाहिए, बल्कि समाज को एकजुट करने वाला होना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बयान आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दिया गया, जहां देश के भविष्य से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर संघ प्रमुख की टिप्पणी
संघ प्रमुख ने भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी समझौता लेन-देन पर आधारित होता है। भागवत ने कहा, ‘‘यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होना चाहिए… हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसमें हमारे देश का कोई नुकसान न हो।” यह आर्थिक रिश्तों की मजबूती और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वीर सावरकर को भारत रत्न और संघ के ‘अच्छे दिन’ पर राय
वीर सावरकर को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की लगातार उठ रही मांग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सावरकर को यह पुरस्कार मिलने से इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। उनका यह बयान उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है जो लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं। सावरकर के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की बात पर संघ प्रमुख ने अपनी सहमति जताई।
संघ प्रमुख ने आरएसएस के लिए ‘अच्छे दिन’ आने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि संगठन के स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत और वैचारिक नीतियों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के कारण ही ये ‘अच्छे दिन’ आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह बात संगठन की जड़ों को मजबूत करने और उसके भविष्य की दिशा को स्पष्ट करती है। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को और अधिक निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





