

Jale News: जैसे किसी चलते-फिरते इतिहास का एक अध्याय समाप्त हो गया हो, जाले प्रखंड के रतनपुर गांव में रविवार को एक सदी का सूरज हमेशा के लिए अस्त हो गया। 104 वर्ष की आयु में जेबरी देवी के निधन की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। वे न केवल अपनी लंबी आयु के लिए, बल्कि अपने स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए भी एक मिसाल थीं।
जेबरी देवी का जीवन गांव के लिए एक खुली किताब की तरह था, जिसमें सादगी, धर्म और सामाजिकता के पाठ थे। उनके निधन से गांव ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। परिजनों के अनुसार, वे अंतिम समय तक काफी हद तक सक्रिय रहीं और अपनी दिनचर्या का पालन करती थीं।
Jale News: सादगी और मिलनसार स्वभाव की थीं प्रतिमूर्ति
जेबरी देवी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पूंजी उनका सरल और मिलनसार स्वभाव था। वे हर किसी से प्रेम और अपनेपन से मिलती थीं, यही वजह थी कि गांव का हर व्यक्ति उनका सम्मान करता था। परिवार को एक मजबूत धागे में पिरोकर रखने में उनकी भूमिका किसी विशाल वटवृक्ष की तरह थी, जिसकी छाया में कई पीढ़ियां पली-बढ़ीं। यह शतायु महिला अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं, जिसमें पुत्र-पुत्रियां, पोते-पोतियां और परपोते-परपोतियां शामिल हैं।
उनके जीवन की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज के दौर में जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां आम हैं, वहीं जेबरी देवी ने 104 साल तक एक अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीकर एक अद्भुत उदाहरण पेश किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, एक युग का हुआ अंत
रविवार को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली तो पूरे गांव की आंखें नम थीं। सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके छोटे पुत्र संजय कुमार ठाकुर ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जेबरी देवी का जाना वास्तव में एक युग का अंत है। उनकी स्मृतियां और आदर्श हमेशा हम सभी का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका पूरा जीवन संघर्ष और संस्कारों की मिसाल रहा, जिसे वे हमेशा जीवित रखेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/




