



Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व है, यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जो भक्तों को भय और बाधाओं से मुक्ति दिलाती है।
Kalashtami 2026: काल भैरव की पूजा से पाएं कष्टों से मुक्ति, ऐसे करें चालीसा का पाठ
Kalashtami 2026: क्यों मनाई जाती है कालाष्टमी?
हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व है, यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित है। हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, जो भक्तों को भय और बाधाओं से मुक्ति दिलाती है। यह पावन अवसर भक्तों को अपने सभी शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। काल भैरव को तंत्र-मंत्र का देवता भी माना जाता है, जिनकी उपासना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन विशेष रूप से Bhairav Nath की आराधना और चालीसा का पाठ करने से असाध्य रोगों और भय से छुटकारा मिलता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह तिथि भगवान भैरव के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाई जाती है, जब उन्होंने ब्रह्मा के अहंकार का नाश किया था।
कालाष्टमी का महत्व और काल भैरव का स्वरूप
कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि भगवान शिव ने जब ब्रह्मा जी के पांचवें मुख को काट दिया था, तब वे ब्रह्महत्या के पाप से ग्रस्त हो गए थे। इसी पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव के काल भैरव रूप की आराधना की थी। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान भैरवनाथ की प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से काल भैरव की आराधना करता है, उसके जीवन से सभी प्रकार के डर, भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। विशेषकर शत्रुओं से मुक्ति पाने और कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन काली भैरवी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
कालाष्टमी पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को काले वस्त्र, नारियल, इमरती, जलेबी, उड़द की दाल और सरसों का तेल अर्पित करें।
- दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती दिखाएं।
- इसके बाद भगवान काल भैरव के समक्ष बैठकर काली भैरवी चालीसा का पाठ करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
- इस दिन कुत्ते को भोजन खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि भैरवनाथ का वाहन कुत्ता है।
काली भैरवी चालीसा का पाठ
कालाष्टमी के दिन काली भैरवी चालीसा का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह चालीसा भगवान भैरव की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली माध्यम है। पूजा के समय इस चालीसा का पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करें:
जय भैरव बाबा बलवाना, भय भंजन जय जय जयमाना।
कृपा निधान करहु कल्याना, मंगल मूरति परम सुजाना।।
(यह केवल एक सांकेतिक अंश है। पूर्ण चालीसा का पाठ करने से भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति आती है।)
यह चालीसा भक्तों को भय से मुक्ति दिलाकर सुख-समृद्धि प्रदान करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कष्टों से मुक्ति और उपसंहार
कालाष्टमी का यह पावन दिन भगवान काल भैरव की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। जो भक्त इस दिन पूरी निष्ठा और श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें सभी प्रकार के कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। भैरवनाथ की कृपा से जीवन में शांति, समृद्धि और निर्भयता आती है। इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना या दान देना भी बहुत शुभ माना जाता है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृ प्रसन्न होते हैं।
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