
Cigarette Price: धूम्रपान करने वालों की जेब पर अब और भारी पड़ने वाला है शौक। केंद्रीय बजट 2026-27 में तंबाकू उत्पादों और सिगरेट पर बढ़े हुए टैक्स ने इस लत को पहले से कहीं ज्यादा महंगा कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऐलान के बाद 1 फरवरी से देशभर में नई कीमतें लागू हो गई हैं, जिसका सीधा असर करोड़ों उपभोक्ताओं पर दिख रहा है।
बजट के बाद उछली सिगरेट की कीमत: जेब पर भारी पड़ेगा शौक!
सिगरेट की कीमत में भारी उछाल: क्या कहते हैं आंकड़े?
बजट में हुई टैक्स बढ़ोतरी ने सिगरेट ब्रांड्स की कीमतों में जबरदस्त इजाफा किया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्टेलर डिफाइन पान का 20 सिगरेट वाला पैकेट है, जिसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) 200 रुपये से बढ़कर 380 रुपये हो गई है। यह लगभग 90 प्रतिशत की चौंकाने वाली बढ़ोतरी है। इसी तरह, गोल्ड फ्लेक स्मॉल का 10 सिगरेट वाला पैकेट अब 95 रुपये के बजाय 140 रुपये में मिल रहा है, जो करीब 47 प्रतिशत की वृद्धि है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इतनी तेज टैक्स बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं को सकते में डाल दिया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रोजमर्रा की स्मोकिंग अब कितनी महंगी पड़ेगी।
सिगरेट की कीमतों में यह बढ़ोतरी भारत में तंबाकू उत्पादों पर टैक्स लगाने के स्ट्रक्चर में किए गए व्यापक बदलावों का नतीजा है। बजट में सिगरेट की लंबाई, फिल्टर और अन्य स्टैंडर्ड के आधार पर टैक्स स्लैब को रिवाइज किया गया है। यह टैक्स बढ़ोतरी सरकार की राजस्व रणनीति का हिस्सा भी है। इसके साथ ही सेस और अनुपालन (कम्प्लायंस) लागत बढ़ने से कंपनियों पर टैक्स का बोझ और ज्यादा बढ़ गया है। इसी अतिरिक्त लागत को कंपनियों ने सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दिया है, जिससे लगभग सभी श्रेणियों की सिगरेट महंगी हो गई हैं।
इसका असर खुदरा स्तर पर साफ दिखने लगा है। जहां पहले एक सिगरेट की कीमत करीब 10 रुपये होती थी, अब वही सिगरेट 12 से 13 रुपये में मिल रही है। यानी प्रति सिगरेट 2 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के मुताबिक, 75 से 85 एमएम लंबाई वाली सिगरेट की संशोधित कीमतों में 22 से 28 प्रतिशत तक का उछाल आया है।
स्वास्थ्य पर लगाम और राजस्व का गणित
सरकार का कहना है कि सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स लगाने का मकसद खासतौर पर पहली बार स्मोकिंग शुरू करने वालों और युवाओं को हतोत्साहित करना है। नीति निर्धारकों की कोशिश है कि सिगरेट को महंगा बनाकर इसकी मांग में कमी लाई जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से यह मानते आए हैं कि तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए ऊंचा टैक्स सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/।
अब तक सिगरेट पर टैक्स 2017 में तय किए गए फ्रेमवर्क के तहत लगाया जाता था, जिसके तहत 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ कंपन्सेशन सेस वसूला जाता था। लेकिन हालिया बजट में सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सिगरेट पर तीन-स्तरीय टैक्स संरचना लागू कर दी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके तहत अब सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लगाई जा रही है, साथ ही हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस भी जोड़ा गया है और जीएसटी की दर बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। इस बदले हुए टैक्स स्ट्रक्चर के चलते सिगरेट कंपनियों पर कर बोझ काफी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर कीमतों में तेज बढ़ोतरी के रूप में उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
प्रमुख बदलाव और उपभोक्ता पर असर:
स्टेलर डिफाइन पान (20 सिगरेट): ₹200 से ₹380 (लगभग 90% की वृद्धि)।
गोल्ड फ्लेक स्मॉल (10 सिगरेट): ₹95 से ₹140 (लगभग 47% की वृद्धि)।
* प्रति सिगरेट कीमत में ₹2 से ₹3 तक की बढ़ोतरी।
* 75 से 85 एमएम लंबाई वाली सिगरेट की कीमतों में 22 से 28 प्रतिशत तक का उछाल।
* नई टैक्स संरचना में एक्साइज ड्यूटी, हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस, और 40% जीएसटी शामिल।
ये बदलाव न केवल धूम्रपान करने वालों के मासिक बजट को बिगाड़ेंगे, बल्कि सरकार के राजस्व में भी वृद्धि करेंगे, जिसका एक हिस्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर खर्च किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सिगरेट की कीमत में वृद्धि वास्तव में धूम्रपान की आदतों को बदलने में सफल होती है।





