



Bihar Politics: सत्ता के गलियारों में जब जुबानी तीर चलते हैं, तो बहस सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अक्सर दिलों में टीस बनकर चुभ जाती है। बिहार की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब सदन में कानून-व्यवस्था पर उठे सवालों ने टकराव का रूप ले लिया।
Bihar Politics: जब नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी पर साधा निशाना, विधान परिषद में गरमाई बिहार की सियासत
बिहार की राजनीति में तल्खी: विधान परिषद में हुआ तीखा टकराव
बिहार विधान परिषद में कानून-व्यवस्था को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी के बीच हुए सीधे संवाद ने सदन का माहौल पूरी तरह से बदल दिया। विपक्षी सदस्यों द्वारा राज्य की कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिस पर मुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धैर्य खोते हुए राबड़ी देवी पर सीधा तंज कसा। उन्होंने मगही भाषा में कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्होंने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री के लहजे और शब्दों ने यह साफ कर दिया कि वे विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों से बिल्कुल खुश नहीं थे। नीतीश कुमार राबड़ी देवी को.. ई जो लड़की है… कहते सुने गए।
मगही के बोल और राजनीतिक मायने
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को संबोधित करते हुए मगही में कहा, “अरे ई सब को कुछ आता था?” इस एक वाक्य ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया। यह टिप्पणी सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक तंज था, जो राजद के पिछले शासनकाल और उनकी कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार था। इस बयान के बाद सदन में गहमागहमी बढ़ गई और दोनों पक्षों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मगही में की गई इस टिप्पणी को राजनीतिक विश्लेषक एक सोची-समझी रणनीति के तहत देख रहे हैं, जिसका उद्देश्य विपक्ष के सवालों को कमजोर करना और उनके अतीत पर सवाल उठाना था।
इस घटना से सदन के भीतर का वातावरण तनावपूर्ण हो गया। विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने उनके बयान का बचाव किया। यह घटना दर्शाती है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बिहार एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/
सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष: कानून-व्यवस्था पर गरमागरम बहस
विधान परिषद में यह टकराव कोई नई बात नहीं है, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था पर बहस लगातार जारी रहती है। विपक्ष अक्सर अपराधों में वृद्धि और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता रहा है, जबकि सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार का दावा करती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सरकार के सुशासन के मॉडल पर जोर देते रहे हैं, लेकिन विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर उन्हें घेरने का प्रयास करता है। यह सियासी तनातनी अक्सर सदन के बाहर भी देखने को मिलती है और आगामी चुनावों में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आगे की राह: क्या सुलझेगा सियासी गतिरोध?
इस ताजा टकराव के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री का यह सीधा हमला राबड़ी देवी और राजद के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, जिस पर वे निश्चित रूप से पलटवार करेंगे। यह घटना न केवल सदन की मर्यादा पर सवाल उठाती है, बल्कि राज्य के सियासी माहौल में गर्माहट भी घोल देती है। ऐसे में, आम जनता उम्मीद कर रही है कि जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस हो, बजाय इसके कि व्यक्तिगत टिप्पणियों और तंज-कसने में समय बर्बाद हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

