



Rahul Gandhi Parliament: लोकसभा में विपक्ष की आवाज़ को खामोश करने का प्रयास किसी लोकतंत्र के लिए अशुभ संकेत से कम नहीं। जब सदन में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं मिलती, तो सवाल उठना लाज़मी है।
राहुल गांधी पार्लियामेंट: लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया, प्रियंका गांधी बोलीं- यह लोकतंत्र नहीं!
सोमवार को संसद के निचले सदन लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को अपने विचार रखने की अनुमति नहीं दी गई। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह कैसा लोकतंत्र है, जहां विपक्ष के नेता को अपनी बात कहने का मौका ही न मिले।
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी को एक मिनट भी बोलने की अनुमति न देना ‘हास्यास्पद’ है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा, “यह बहुत दुखद है कि हम सदन जाते हैं और बस बाहर आ जाते हैं। विपक्ष के नेता को एक मिनट भी बोलने की अनुमति नहीं दी जाती। यह हास्यास्पद है। यह लोकतंत्र नहीं है। हम यहां किसलिए आते हैं? उन्हें बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।”
राहुल गांधी पार्लियामेंट: सदन में क्या हुआ?
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब विपक्ष द्वारा राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने के विरोध में सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित होने के बाद फिर से शुरू हुई। राहुल गांधी ने खुद सदन में दावा किया कि अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उन्हें अपने विचार रखने की अनुमति दी जाएगी। गांधी ने सदन में कहा था, “एक घंटे पहले सदन का एक सदस्य अध्यक्ष के पास गया था, अध्यक्ष ने हमें आश्वासन दिया था कि मुझे यहां बोलने और बजट चर्चा से पहले कुछ मुद्दे उठाने की अनुमति दी जाएगी। अब आप अपने वादे से मुकर रहे हैं। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि क्या मुझे वे मुद्दे उठाने की अनुमति है या नहीं?” इस घटना से संसद में हंगामा और बढ़ गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में लगातार व्यवधान पैदा करने के लिए विपक्ष की कड़ी आलोचना की।
इसके अतिरिक्त, प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सदन में न आने का आग्रह किया था। अध्यक्ष ने यह बयान इस जानकारी के आधार पर दिया था कि कुछ कांग्रेस सांसद सदन में प्रधानमंत्री की सीट पर आकर ‘अप्रत्याशित घटना’ को अंजाम दे सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रियंका गांधी ने सांसदों का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हाथ नहीं उठा सकतीं। उन्होंने कहा, “मैं पहले ही कह चुकी हूं कि स्पीकर का अपमान हुआ है और उन पर इतना दबाव है कि उन्हें खुद बयान देने पड़ रहे हैं।”
अध्यक्ष के बयान पर उठे सवाल
उन्होंने आगे कहा, “मेरे समेत कांग्रेस की 11 सांसद हैं और सभी बहुत गंभीर हैं… यह बयान सरासर गलत है और सरकार के दबाव में दिया गया है… प्रधानमंत्री सदन में आने का साहस नहीं दिखा पाए, इसीलिए स्पीकर को उनकी ओर से ऐसा बयान देना पड़ा, जो गलत है।” यह स्थिति निश्चित रूप से स्वस्थ संसदीय परंपराओं के लिए ठीक नहीं है और मौजूदा राजनीतिक माहौल में संसद में हंगामा जारी है। यह घटना लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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