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फ़रवरी, 10, 2026
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Arms License in Bihar: अब मुखिया जी के हाथों में होगा पिस्तौल… वो भी 60 दिनों के भीतर… DM साहेब को देना होगा जवाब, नहीं तो…

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Arms License in Bihar पर क्यों अटकी थी फाइल?

बिहार विधानसभा के सदन में आज एक बेहद महत्वपूर्ण मामला गूंजा, जिसने प्रशासनिक सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक विधायक ने सरकार का ध्यान पंचायत प्रतिनिधियों के उन शस्त्र लाइसेंस आवेदनों की ओर खींचा, जो सालों से धूल फांक रहे थे। उन्होंने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश के बावजूद, पूरे प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों को आत्मरक्षा के लिए जरूरी आर्म्स लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने दो से तीन साल पहले ही आवेदन किया था, लेकिन जिलाधिकारियों के स्तर पर ये फाइलें आगे ही नहीं बढ़ीं।

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विधायक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जब वे क्षेत्र के दौरे पर जाते हैं, तो पंचायत प्रतिनिधि उनसे यही सवाल पूछते हैं कि आखिर उनके लाइसेंस का क्या हुआ। यह स्थिति न केवल प्रतिनिधियों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है, बल्कि व्यवस्था के प्रति उनके भरोसे को भी कमजोर कर रही थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने सरकार से एक निश्चित समय-सीमा की मांग की, जिसके भीतर इन लंबित आवेदनों का निपटारा किया जा सके।

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गृह मंत्री ने दिया 60 दिनों का अल्टीमेटम

सदन में उठे इस गंभीर सवाल पर सरकार की ओर से गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक गंभीर मामला है और इसे लंबे समय तक लंबित रखना किसी भी सूरत में उचित नहीं है। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए एक बड़ी घोषणा की। सम्राट चौधरी ने कहा कि गृह विभाग ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है और सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

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उन्होंने ऐलान किया कि अब से किसी भी शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को 60 दिनों से ज्यादा लंबित नहीं रखा जा सकता है। गृह विभाग सभी जिलाधिकारियों को पत्राचार के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का आदेश देगा कि 60 दिनों के भीतर या तो लाइसेंस जारी किया जाए या आवेदन को निरस्त करने का स्पष्ट कारण बताया जाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। गृह मंत्री के इस जवाब के बाद उम्मीद है कि उन पंचायत प्रतिनिधियों को जल्द राहत मिलेगी, जो अपनी सुरक्षा के लिए लाइसेंस का इंतजार कर रहे थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होगी और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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