



Gaura Bauram News: जैसे खेत को पानी और फसल को खाद की जरूरत होती है, वैसे ही खेल प्रतिभाओं को एक अदद मैदान की दरकार होती है। इसी सपने को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए अब दरभंगा जिले में एक बड़ी पहल शुरू की गई है, जिसके तहत पंचायत स्तर पर बने खेल के मैदानों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
जिला खेल पदाधिकारी, दरभंगा ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त को पत्र भेजकर प्रखंडवार शिक्षकों की एक सूची जारी की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन मैदानों की मौजूदा हालत, उनकी उपयोगिता और उनमें सुधार की गुंजाइश का पता लगाना है। इसी क्रम में गौरा-बौराम प्रखंड के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, बिरौल अकबरपुर के +2 बीपीएससी शिक्षक केशव कुमार चौधरी को सौंपी गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्हें अपने प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सभी पंचायतों के खेल मैदान का स्थलीय निरीक्षण कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
Gaura Bauram News: क्यों महत्वपूर्ण है यह निरीक्षण?
यह निरीक्षण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। नामित शिक्षक केशव कुमार चौधरी को यह सुनिश्चित करने का काम दिया गया है कि वे हर पंचायत में जाकर देखें कि मैदान खेलने योग्य है या नहीं, वहां क्या-क्या सुविधाएं हैं और खिलाड़ियों के लिए उसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही विभाग आगे की कार्ययोजना तैयार करेगा ताकि इन मैदानों का कायाकल्प हो सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस पहल से उम्मीद है कि वर्षों से उपेक्षित पड़े कई खेल के मैदानों को नई जिंदगी मिलेगी।
इस नई जिम्मेदारी पर शिक्षक केशव कुमार चौधरी ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। उन्होंने कहा, “पंचायत स्तर पर खेल मैदानों का सही निरीक्षण होने से खेल सुविधाओं में निश्चित रूप से सुधार होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि रिपोर्ट पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार कर समय पर विभाग को सौंपी जाए, ताकि इसका लाभ जल्द से जल्द स्थानीय प्रतिभाओं को मिल सके।”
ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच
जिला प्रशासन का यह कदम उन ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो सुविधाओं के अभाव में अपने हुनर को निखार नहीं पाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती, लेकिन सही मंच और बुनियादी ढांचा न होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो गौरा-बौराम समेत पूरे जिले में खेल का एक नया माहौल तैयार हो सकता है, जिससे भविष्य के लिए बेहतरीन खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पहल ग्रामीण बिहार में खेल क्रांति की नींव का पत्थर साबित हो सकती है।



