



Bihar Employment: बिहार की प्रशासनिक मशीनरी अब सिर्फ फाइलों के बोझ तले नहीं दबेगी, बल्कि गुणवत्ता और रफ्तार के नए हाईवे पर दौड़ने को तैयार है। विकास की इस गाड़ी में रोजगार का इंजन भी पूरी ताकत से धड़क रहा है, जिसके शोर ने लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी है। सोमवार को सूचना भवन के सभागार में आयोजित एक प्रेस वार्ता में, सामान्य प्रशासन विभाग ने अपनी प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी।
Bihar Employment: गुणवत्ता और पारदर्शिता के दम पर प्रशासनिक तंत्र को मिली नई पहचान
बिहार के प्रशासनिक तंत्र को गुणवत्ता और पारदर्शिता के नए मानकों पर स्थापित करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन ISO 9001:2015 प्राप्त हुआ है। विभाग ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग एवं बिहार लोक सेवा अधिकार प्राधिकरण (बिपार्ड) को यह प्रमाणन 21 जनवरी 2024 को औपचारिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रदान किया गया है। यह सर्टिफिकेशन विभाग की कार्यप्रणाली, सेवा वितरण और शिकायत निवारण प्रणाली की बेहतरीन गुणवत्ता को मान्यता देता है।
बिहार लोक सेवा अधिकार अधिनियम, 2011 के तहत राज्य के 14 विभागों की 153 प्रकार की सेवाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक राज्य में 51.13 करोड़ से अधिक आवेदनों का सफल निष्पादन किया जा चुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं:
- जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र
- नया राशन कार्ड
- मजदूर दुर्घटना अनुदान
- चालक अनुज्ञप्ति का निर्गमन
- कन्या उत्थान योजना
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन
गांव-गांव तक पहुंची सरकारी सेवाएं, शिकायत निवारण भी हुआ मजबूत
सरकार के प्रशासनिक सुधार कार्यक्रम के तहत अब सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाया गया है। पंचायत सरकार भवनों एवं पंचायत भवनों में संचालित लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से 64 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को अब छोटे-छोटे कामों के लिए प्रखंड, अनुमंडल या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
इसके साथ ही, बिहार लोक सेवा शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत 45 विभागों की 514 सेवाओं एवं योजनाओं में समय पर शिकायत निस्तारण सुनिश्चित किया गया है। 22 जनवरी 2016 से अब तक 18.57 लाख से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। वहीं, बिहार सरकारी सेवक शिकायत निवारण प्रणाली के तहत भी 3 जून 2019 से अब तक 14,569 मामलों का समाधान किया गया, जो सरकार की जवाबदेही को दर्शाता है।
डिजिटल प्रबंधन से लेकर मुख्यमंत्री फेलोशिप तक, जानिए अन्य बड़े फैसले
प्रेस वार्ता में बताया गया कि 1 अप्रैल 2020 से 6 फरवरी 2024 तक सरकारी क्षेत्र में 9,84,141 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है। इसमें 7,95,832 नियमित नियुक्तियां, 1,17,784 संविदा नियोजन और 70,525 बाह्य स्रोत से नियुक्त कर्मी शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हाल ही में, विभिन्न आयोगों को 1,50,561 पदों की अधियाचना भी भेजी गई है, जिससे भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
युवाओं को सरकार के साथ काम करने का अवसर देने के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत 121 विषय विशेषज्ञों का चयन कर उन्हें राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालयों में काम करने का मौका मिलेगा। इस महत्वपूर्ण योजना के लिए बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी और आईआईएम बोधगया के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर हो चुके हैं।
विभाग ने मानव संसाधन और संपत्ति प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। HRMS के तहत 2.72 लाख सेवा अभिलेखों का डिजिटलीकरण और 48 विभागों के 8 लाख कर्मियों का सेवा-वेतन प्रबंधन किया जा रहा है। साथ ही, ‘जिज्ञासा’ और ‘समाधान’ कॉल सेंटर के माध्यम से लाखों नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया गया है। सरकार ने गया का नाम बदलकर ‘गयाजी’ करने जैसे अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं।




