



पटना की नब्ज पर सियासत की सरगर्मी ऐसी कि हर खबर एक नया मोड़ लेती है। इसी मोड़ पर अब गंगा पथ की दुकानें ग्रामीण महिलाओं के लिए नए क्षितिज खोलने को तैयार हैं।
Patna News: जेपी गंगा पथ की दुकानें अब जीविका की महिलाओं को मिलेंगी, बदलेगी तस्वीर
Patna News: गंगा पथ की रौनक, ग्रामीण महिलाओं की पहचान
पटना के प्रतिष्ठित जेपी गंगा पथ से हटाई गई प्री-फैब्रिकेटेड दुकानें अब ग्रामीण विकास की नई इबारत लिखने जा रही हैं। इन अस्थाई दुकानों को ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूह जीविका को सौंपने का निर्णय लिया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ा अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल गंगा पथ पर रौनक लौटाएगी, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका को भी नया आयाम देगी। बुधवार को होने वाली एक अहम बोर्ड बैठक में इस संबंध में अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
दरअसल, जेपी गंगा पथ पर कुछ समय पूर्व ये प्री-फैब्रिकेटेड दुकानें लगाई गई थीं, जिनका उद्देश्य पथ पर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सुविधाएं प्रदान करना था। हालांकि, विभिन्न कारणों से इन्हें हटाना पड़ा। अब प्रशासन ने इन खाली हो चुकी संरचनाओं का सदुपयोग करने की योजना बनाई है, जिसके केंद्र में ग्रामीण महिलाएं हैं। यह कदम बिहार सरकार की दूरदर्शी नीतियों का एक हिस्सा है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिसका लक्ष्य समाज के वंचित तबके को मुख्यधारा से जोड़ना है।
जीविका, बिहार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिसने प्रदेश की लाखों ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त किया है। इन समूहों की महिलाएं विभिन्न प्रकार के लघु उद्योग चलाती हैं, जैसे हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण और अन्य स्थानीय उत्पाद। इन दुकानों के जीविका को मिलने से उन्हें अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का एक स्थायी और प्रमुख स्थान मिल जाएगा। यह निश्चित रूप से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस निर्णय से जीविका दीदियों को अपने बनाए सामानों को बेचने के लिए एक नया और आकर्षक मंच मिलेगा। वे यहां चाय-नाश्ते की दुकान, स्थानीय व्यंजनों का स्टॉल, हस्तकला या अन्य उत्पादों की बिक्री कर सकेंगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने और अंतिम निर्णय लेने के लिए बुधवार को एक उच्च-स्तरीय बोर्ड बैठक बुलाई गई है। उम्मीद है कि इस बैठक के बाद इन दुकानों का हस्तांतरण सुचारु रूप से हो सकेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ग्रामीण उत्थान की नई पहल
यह योजना सिर्फ दुकानें सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सेतु बनाने की एक बड़ी पहल है। जेपी गंगा पथ, जो अब पटना का नया पर्यटन स्थल बन चुका है, वहां जीविका उत्पादों की उपलब्धता से स्थानीय संस्कृति और हस्तकला को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के सरकार के प्रयासों को मजबूत करेगा। इस तरह की पहल से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होते हैं बल्कि समुदायों में आत्मविश्वास और उद्यमशीलता की भावना भी बढ़ती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। जब आगंतुक स्थानीय, हाथ से बने उत्पादों को देखेंगे और खरीदेंगे, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा होगा। यह ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने में मदद करेगा, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक कद बढ़ेगा। यह एक ऐसा मॉडल है जिसे अन्य जगहों पर भी दोहराया जा सकता है ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खुल सकें।





