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फ़रवरी, 10, 2026
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Tej Pratap Yadav Controversy: मेडिकल रिपोर्ट में ‘पति के नाम’ का खुलासा, क्या इसी वजह से RJD से दूर हुए तेज प्रताप?

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Tej Pratap Yadav Controversy: राजनीति का अखाड़ा अक्सर निजी रिश्तों की बिसात बन जाता है, और बिहार के सियासी गलियारों में एक नया बवंडर इसी फेर में उलझ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव से जुड़ा एक निजी मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक मेडिकल रिपोर्ट में ‘पति के नाम’ के खुलासे ने न सिर्फ उनके निजी जीवन को सुर्खियों में ला दिया है, बल्कि इसने बिहार की राजनीति में भी गरमाहट पैदा कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निजी विवाद ही वह कारण था जिसने उन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान आरजेडी में वह स्थान नहीं मिल पाया जिसकी शायद उन्हें उम्मीद थी।

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Tej Pratap Yadav Controversy: ‘पति के नाम’ का रहस्य और सियासी हलचल

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक मेडिकल रिपोर्ट में किसी महिला के ‘पति के नाम’ के कॉलम में तेज प्रताप यादव का नाम लिखा होने की बात सार्वजनिक हुई। इस खुलासे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। कहा जा रहा है कि यह जानकारी लालू परिवार के सदस्यों, विशेषकर रोहिणी आचार्य और अन्य करीबियों को पहले से थी। इसी जानकारी के आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पारिवारिक विवाद ने राजद के शीर्ष नेतृत्व को असहज किया होगा, जिसके चलते विधानसभा चुनाव के दौरान तेज प्रताप यादव को पार्टी में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं दी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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हालांकि, इस मामले पर लालू परिवार या तेज प्रताप यादव की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषक इसे राजद की अंदरूनी रणनीति और पारिवारिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे व्यक्तिगत जीवन के पहलू सार्वजनिक और राजनीतिक क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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राजद की रणनीति और पारिवारिक समीकरण

बिहार की राजनीति में लालू परिवार का दबदबा हमेशा से रहा है। ऐसे में परिवार से जुड़े किसी भी निजी मामले का राजनीतिकरण होना कोई नई बात नहीं है। विधानसभा चुनाव के वक्त तेज प्रताप यादव की सक्रियता को लेकर भी कई सवाल उठे थे। उनके समर्थकों का मानना था कि उन्हें पार्टी में और बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब इस ‘पति के नाम’ वाले खुलासे को उस कथित अनदेखी से जोड़ा जा रहा है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे पारिवारिक विवाद पार्टी की छवि और एकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। राजद जैसी पार्टी, जिसका आधार मजबूत पारिवारिक रिश्तों पर टिका है, उसके लिए ऐसी खबरें चिंता का विषय बन सकती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह मामला क्या मोड़ लेता है और लालू परिवार इस पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि यह केवल एक निजी मामला न रहकर अब सियासी गलियारों में गरमाहट बनाए हुए है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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