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फ़रवरी, 10, 2026
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष लाया अविश्वास प्रस्ताव, क्या होगा सरकार का अगला कदम?

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अविश्वास प्रस्ताव: संसद के गलियारों में सियासी घमासान, जहां विपक्ष ने अपनी तरकश से एक ऐसा तीर निकाला है, जो सीधे सत्ता के सिंहासन को चुनौती दे रहा है। लोकसभा के मुखिया पर विपक्ष का अविश्वास, लोकतंत्र की नई कसौटी बन चुका है।

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मंगलवार को कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। विपक्ष के नेता के सुरेश और मोहम्मद जावेद ने यह नोटिस प्रस्तुत किया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

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हालांकि, इस प्रक्रिया में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भाग नहीं लिया और वह हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल नहीं है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जानकारी देते हुए बताया कि आज दोपहर 1.14 बजे, नियमों और प्रक्रियाओं के नियम 94सी के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस प्रस्तुत किया गया, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रस्ताव पर लगभग 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।

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कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि सांसदों की यह संख्या व्यापक विपक्षी समर्थन को दर्शाती है और कथित पक्षपात, बोलने का समय न दिए जाने और सत्र के दौरान व्यवधानों को लेकर बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है। यह कदम लोकसभा अध्यक्ष के पद की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग का भी प्रतीक है।

अविश्वास प्रस्ताव: कांग्रेस की रणनीति और विपक्षी एकजुटता

सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि टीएमसी ने अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष की रणनीति से खुद को अलग कर लिया।

टीएमसी का रुख: विपक्ष की रणनीति पर सवालिया निशान

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस संबंध में बयान दिया कि उन्होंने कांग्रेस को सुझाव दिया था कि वह इंडिया ब्लॉक और कांग्रेस की मांगों को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से अपील करे और अध्यक्ष को विपक्ष की अपील पर जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया जाए। बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस आज अपील पेश करती है, तो टीएमसी इस पर हस्ताक्षर नहीं करेगी, लेकिन यदि अध्यक्ष विपक्ष की अपील से सहमत नहीं होते हैं, तो वे अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार होंगे। यह घटनाक्रम विपक्षी एकता पर एक नया प्रश्नचिह्न लगाता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने संसदीय लोकतंत्र की गरिमा का हवाला देते हुए लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता के लिए अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले नोटिस पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं होगा। यह निर्णय संस्थागत मर्यादा और संसदीय परंपराओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जबकि विपक्ष ने सदन के कामकाज और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका पर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/

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इस प्रकार, एक तरफ जहां कांग्रेस ने अध्यक्ष के खिलाफ अपनी असहमति खुलकर जाहिर की है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी का यह कदम संसदीय गरिमा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। बेशक, यह पूरा मामला भारतीय राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ ले चुका है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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