



Rajasthan Education News: राजस्थान सरकार ने स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्रों की पदोन्नति को लेकर नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत अब इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को बिना पास हुए अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।
राजस्थान एजुकेशन न्यूज़: अब 5वीं और 8वीं के छात्र नहीं होंगे सीधे अगली कक्षा में प्रमोट!
स्कूल शिक्षा को मजबूत बनाने और छात्रों की नींव को और बेहतर करने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अगली कक्षा में पदोन्नत होने के लिए न्यूनतम निर्धारित अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने और सीखने के परिणामों में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
राजस्थान एजुकेशन न्यूज़: नई पदोन्नति नीति के प्रमुख बिंदु
पहले, इन कक्षाओं के छात्रों को ‘ऑटो प्रमोशन’ प्रणाली के तहत बिना किसी परीक्षा या न्यूनतम अंकों की शर्त के अगली कक्षा में भेज दिया जाता था। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के कारण बच्चों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता कम हो जाती थी और आगे चलकर उन्हें उच्च कक्षाओं में समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जिससे ड्रॉपआउट दर में भी वृद्धि होती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई छात्र इन कक्षाओं में आवश्यक अंक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे फेल माना जाएगा। यह बदलाव सुनिश्चित करेगा कि हर विद्यार्थी अपनी कक्षा के सीखने के लक्ष्यों को पूरा कर सके।
राजस्थान सरकार की इस नई पहल का मुख्य लक्ष्य बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना है। इस नीति के तहत, छात्रों को अब अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा, जिससे उनकी शैक्षिक नींव मजबूत होगी और उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।
छात्रों को मिलेगा सुधार का सुनहरा अवसर
सरकार ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें दूसरा मौका देने का भी प्रावधान किया है। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे 45 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। इस अवधि में छात्रों को अपनी कमियों को दूर करने और तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्र अपनी कमजोरियों को समझकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कमजोर छात्रों की मदद के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा, जिन्हें रेमेडियल टीचिंग कहा जाएगा। इन कक्षाओं में उन विषयों पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाएगा जिनमें छात्र कमजोर महसूस करते हैं। अनुभवी शिक्षक सरल और प्रभावी तरीकों से छात्रों को पढ़ाएंगे और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान करेंगे। यह विशेष व्यवस्था छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। इन नए परीक्षा नियम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार निश्चित है।
इस नीति का एक बड़ा उद्देश्य स्कूल छोड़ने वाले छात्रों (ड्रॉपआउट) की संख्या को कम करना है। अक्सर कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि के कारण छात्रों को आगे की कक्षाओं में विषयों को समझने में परेशानी होती है और वे अंततः पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। नई व्यवस्था में, फेल होने वाले छात्रों को विशेष कक्षाओं और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से सुधार का मौका मिलेगा। शिक्षकों द्वारा छात्रों की पढ़ाई पर नियमित नजर रखी जाएगी और अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा में सक्रिय सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित हों। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



