



Pradosh Vrat: शिव आराधना का यह पावन पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत किया जाता है, जो शिव कृपा और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। यह व्रत सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले के ‘प्रदोष काल’ में किया जाता है, जिससे शिव शंकर प्रसन्न होकर अपने भक्तों के कष्टों को हरते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में फरवरी माह के पहले प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
Pradosh Vrat: फरवरी 2026 का पहला प्रदोष व्रत और शिव कृपा प्राप्ति का महत्व
वर्ष 2026 में फरवरी माह का पहला प्रदोष व्रत 12 फरवरी, गुरुवार को पड़ रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को ‘गुरु प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से की गई शिव पूजा व्यक्ति को रोग-दोष से मुक्त कर लंबी आयु प्रदान करती है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और सायंकाल में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
Pradosh Vrat के पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि
गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल में पूजा करना सर्वोत्तम माना गया है। इस शुभ अवसर पर शिव पूजा का विशेष विधान है।
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त (फरवरी 2026)
| विवरण | तिथि एवं समय |
|---|---|
| प्रदोष व्रत | गुरुवार, 12 फरवरी 2026 |
| माघ शुक्ल त्रयोदशी प्रारंभ | 12 फरवरी 2026, शाम 05:40 बजे से |
| माघ शुक्ल त्रयोदशी समाप्त | 13 फरवरी 2026, शाम 05:05 बजे तक |
| प्रदोष काल पूजा मुहूर्त | 12 फरवरी 2026, शाम 06:10 बजे से रात 08:30 बजे तक |
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा कुछ इस प्रकार करें:
- प्रातःकाल स्नान: व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- संकल्प: भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
- मंदिर या घर पर पूजा: दिनभर निराहार या फलाहार व्रत रखें। शाम के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- वेदी तैयार करना: पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और एक छोटी चौकी पर सफेद या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- अभिषेक: शिव लिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें।
- सामग्री अर्पण: बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- दीपक और धूप: गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाएं।
- मंत्र जाप: भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
”’ॐ नमः शिवाय।”’
”’महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”’
- आरती: अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
- कथा श्रवण: प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करें।
- फलाहार/भोजन: पूजा संपन्न होने के बाद फलाहार ग्रहण करें या अगले दिन व्रत का पारण करें।
प्रदोष व्रत का महत्व
गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान शिव और गुरु ग्रह दोनों की कृपा दिलाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-पूर्वक पूजन करने से साधक को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।
उपाय: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को काले तिल मिले जल से अभिषेक करने से शनि दोष शांत होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें



