



Himanta Biswa Sarma: राजनीति का अखाड़ा अक्सर आरोपों और प्रत्यारोपों से गर्म रहता है, और असम की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा है। इस बार दांव पर केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि 500 करोड़ का मानहानि का मुकदमा है।
कांग्रेस के दिग्गजों पर Himanta Biswa Sarma का 500 करोड़ का मानहानि केस, जमीन विवाद में घिरा असम
Himanta Biswa Sarma बनाम कांग्रेस: 500 करोड़ की कानूनी जंग
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं जितेंद्र सिंह, भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मुकदमा उनकी जमीनों को लेकर लगाए गए ‘झूठे और दुर्भावनापूर्ण’ आरोपों के संबंध में किया गया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि पार्टी की जांच में पता चला है कि मुख्यमंत्री सरमा और उनके परिवार के सदस्यों ने राज्य भर में लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है। इन गंभीर आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री सरमा ने त्वरित प्रतिक्रिया दी और घोषणा की कि वे बिना किसी सबूत के ऐसे दावे करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। मंगलवार को, इस घोषणा को अमली जामा पहनाया गया और 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग वाला मुकदमा अदालत में पेश किया गया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की, “आज मैंने कांग्रेस नेताओं जितेंद्र सिंह, भूपेश बघेल और गौरव गोगोई के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मेरे खिलाफ झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे 12,000 बीघा जमीन हड़पने के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए पुराने ‘राष्ट्रविरोधी’ आरोपों को हवा दे रहे हैं। गोगोई के अनुसार, ‘समय परिवर्तन यात्रा’ ने कथित 12,000 बीघा जमीन विवाद के मामले को उजागर किया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “पहले मैंने भी कहा था कि यह असफल होगा; यह असफल नहीं, बल्कि बेहद असफल है।” उन्होंने सरमा पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने 10 सितंबर को इस मुद्दे पर कुछ कहने का इरादा किया था, लेकिन उसके बाद छह महीने तक वह निष्क्रिय रहे। अगर यह विषय इतना महत्वपूर्ण था, तो पिछले छह महीनों में वे क्या कर रहे थे? गोगोई ने जोर दिया कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस उनकी 12,000 बीघा जमीन के मुद्दे को जनता के सामने ला रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘समय परिवर्तन यात्रा’ को देखकर लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और एक नए ‘बोर असम’ की परिकल्पना कर रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जमीन विवाद और सियासत का दांव-पेच
गोगोई ने आगे कहा कि पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं किया, क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। वे सरकार और पत्रकारों को अपनी बात समझाने में विफल रहे, जिसे गोगोई ने एक बड़ी विफलता बताया। इन जमीन हड़पने के आरोपों और उनके इर्द-गिर्द घूमती सियासत के बीच असम का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले दिन में, गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा अपनी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पर लगाए गए आरोपों का भी खंडन किया और मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘पूरी तरह विफल’ करार दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, गोगोई ने सरमा के आरोपों का जवाब देते हुए ‘समय परिवर्तन यात्रा’ का उल्लेख किया, जिसे कांग्रेस ने राज्य में भाजपा द्वारा कथित भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक राजनीति को उजागर करने के लिए शुरू किया था। इन गरमागरम बयानों और कानूनी दांव-पेंचों के बीच, यह जमीन विवाद असम की राजनीति में एक नया मोड़ ले चुका है।






