



Mithila Painting: रंगों की दुनिया में जब कला और शिक्षा का मेल होता है, तो नई प्रतिभाएं जन्म लेती हैं। इसी संगम का साक्षी बना एक विशेष आयोजन। केवटी के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय पचाढ़ी में आयोजित 15 दिवसीय मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया है, जिसने छात्रों को इस प्राचीन कला की बारीकियों से रूबरू कराया।
Mithila Painting: पीएम श्री नवोदय विद्यालय में मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन
कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय पचाढ़ी, केवटी में आयोजित 15 दिवसीय मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण कार्यशाला का हाल ही में भव्य समापन हुआ। इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को मिथिला पेंटिंग की पारंपरिक एवं समकालीन शैलियों का व्यवस्थित और गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उनकी रचनात्मकता को नई उड़ान मिली।

मिथिला पेंटिंग: पारंपरिक शैली से आधुनिक प्रयोग तक
कार्यशाला के दौरान, मुख्य प्रशिक्षक नीलम चौधरी और उनके सहायक संजय कुमार झा ने विद्यार्थियों को मिथिला पेंटिंग के विभिन्न कलात्मक एवं तकनीकी पहलुओं से परिचित कराया। छात्रों ने न केवल कागज़ पर इस कला का अभ्यास किया, बल्कि पारंपरिक कला को समकालीन उपयोगिता से जोड़ते हुए जूट के बैग पर भी मिथिला चित्रांकन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस पहल से विद्यार्थियों में कला के व्यावसायिक एवं उद्यमशील पक्षों की भी गहरी समझ विकसित हुई। यह कला कार्यशाला छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

युवा कलाकारों का उद्यमी सफर
प्रशिक्षण के अंतिम दिन, विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई आकर्षक चित्रों की एक प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में कागज़ और जूट के बैग पर बनाई गई बेहतरीन मिथिला कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने सभी आगंतुकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उनकी सृजनात्मक क्षमता की खूब सराहना की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उप प्राचार्य डॉ. चंद्रसेन द्वारा मुख्य प्रशिक्षक और सहायक प्रशिक्षक को प्रमाणपत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके योगदान को सम्मानित किया गया। यह कार्यशाला न केवल कला कौशल में वृद्धि का माध्यम बनी, बल्कि इसने युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और उसे व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाने की प्रेरणा भी दी।






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