



AI Rules: भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े नियमों को लेकर सरकार का रुख अब और भी सख्त हो गया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक नया और कड़ा आदेश जारी किया है, जिसका सीधा असर AI से बने आपत्तिजनक सामग्री पर पड़ेगा। यह कदम डिजिटल युग में बढ़ती डीपफेक समस्या से निपटने और ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
AI Rules: डीपफेक पर सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक, अब 3 घंटे में हटेगी आपत्तिजनक सामग्री
AI Rules का नया दौर: निगरानी और जवाबदेही बढ़ी
केंद्र सरकार ने 10 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए संशोधित आईटी नियमों की घोषणा की है, जिसके तहत AI-जनित डीपफेक कंटेंट पर अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इन नए दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन स्पेस को सुरक्षित बनाना और गलत सूचना के प्रसार को रोकना है। इस पहल के बाद, सोशल मीडिया कंपनियों को किसी भी आपत्तिजनक, भ्रामक या हानिकारक डीपफेक सामग्री को शिकायत मिलने के तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। यह पहले के 24-घंटे के नियम की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो सरकार की तत्परता को दर्शाता है।
इस नए नियम के तहत, AI द्वारा बनाई गई किसी भी सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रावधान उपयोगकर्ताओं को यह पहचानने में मदद करेगा कि वे जो कंटेंट देख रहे हैं, वह वास्तविक है या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाया गया है। इससे गलत सूचना के शिकार होने की संभावना कम होगी और ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कदम भारत में तेजी से बढ़ते डीपफेक कंटेंट के खतरे से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका उपयोग अक्सर दुष्प्रचार फैलाने, व्यक्तियों को बदनाम करने या वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता है।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में AI के नैतिक उपयोग और इसके संभावित दुरुपयोग पर बहस तेज हो गई है। भारत जैसे बड़े इंटरनेट यूजर बेस वाले देश के लिए यह नियम एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो डिजिटल नागरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब अपनी AI डिटेक्शन और मॉडरेशन क्षमताओं को और मजबूत करना होगा ताकि वे इन सख्त नियमों का पालन कर सकें। यह न केवल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाएगा बल्कि उपयोगकर्ताओं के बीच विश्वास भी पैदा करेगा।
- **प्रमुख नियम और बदलाव:**
- आपत्तिजनक डीपफेक सामग्री को 3 घंटे में हटाना अनिवार्य।
- AI-जनित सभी कंटेंट को लेबल करना अनिवार्य।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना।
- डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर।
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डिजिटल सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की भूमिका
सरकार के इस कदम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ गया है कि वे अपनी नीतियों और प्रौद्योगिकियों को इन नए नियमों के अनुरूप ढालें। उन्हें AI-जनित सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए अधिक परिष्कृत उपकरण विकसित करने होंगे। इसके अलावा, शिकायत निवारण तंत्र को भी अधिक प्रभावी बनाना होगा ताकि उपयोगकर्ताओं की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो सके। यह डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए आवश्यक है।
यह नियम उपयोगकर्ताओं को भी सशक्त बनाता है, क्योंकि उन्हें अब डीपफेक कंटेंट की रिपोर्ट करने का अधिकार है और प्लेटफॉर्म को उस पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत में ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा और अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। भविष्य में, AI के विकास के साथ-साथ ऐसे नियमों का लगातार अपडेट होना भी आवश्यक होगा ताकि तकनीक के दुरुपयोग को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



