



Bihar Film Industry: एक समय था जब बिहार की पहचान सिर्फ उसकी गौरवशाली विरासत और लोक कलाओं तक सीमित थी। लेकिन अब समय बदल रहा है, और इस बदलाव की धमक सिनेमा के गलियारों तक पहुंचने वाली है।
बिहार फिल्म इंडस्ट्री: मनोज बाजपेयी बोले, बिहार बनेगा देश का अगला बड़ा फ़िल्मी हब
बिहार फिल्म इंडस्ट्री: सिनेमा और थिएटर का नया केंद्र
Bihar Film Industry: जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में बिहार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उनका मानना है कि अब बिहार सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और लोक कलाओं तक ही सिमट कर नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही यह फिल्म निर्माण और थिएटर की दुनिया में भी एक मज़बूत पहचान स्थापित करेगा। उनके इस कथन से प्रदेश के कला जगत में एक नई उम्मीद जगी है।
बाजपेयी ने इस बात पर जोर दिया कि नई फिल्म नीति प्रदेश के लिए एक गेम चेंजर साबित होगी। उन्होंने कहा, “बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, यहाँ के कलाकारों में वह जुनून है जो बड़े परदे पर और मंच पर कमाल दिखा सकता है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने बिहार के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता को भी फिल्म निर्माताओं के लिए एक बेहतरीन पृष्ठभूमि बताया।
मनोज बाजपेयी के अनुसार, प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित नई फिल्म नीति न केवल स्थानीय कलाकारों को अवसर प्रदान करेगी, बल्कि बाहर से आने वाले निर्माताओं को भी आकर्षित करेगी। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि बिहार अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलकर एक आधुनिक और गतिशील राज्य के रूप में उभरे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कला और संस्कृति को मिलेगी नई उड़ान
थिएटर के प्रति मनोज बाजपेयी का लगाव जगजाहिर है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बिहार में थिएटर का समृद्ध इतिहास रहा है, जिसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। नई फिल्म नीति में थिएटर और कला अकादमियों को भी बढ़ावा देने के प्रावधान होने चाहिए, जिससे युवा प्रतिभाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह सिर्फ मनोज बाजपेयी का व्यक्तिगत विचार नहीं है, बल्कि बिहार के कई अन्य कलाकार और बुद्धिजीवी भी लंबे समय से इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से बिहार बहुत जल्द एक ऐसा केंद्र बन सकता है, जहाँ से न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकार और फ़िल्में निकलेंगी। इस पहल से बिहार की युवा पीढ़ी को कला के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए एक ठोस आधार मिलेगा।



