



Grahan 2026 Dates: साल 2026 में कुल चार ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों शामिल हैं। इन खगोलीय घटनाओं का ज्योतिष और धर्म में गहरा महत्व है। आइए जानते हैं कि यह ग्रहण कब लगेंगे, भारत में इनकी दृश्यता कैसी रहेगी और किन ग्रहणों पर सूतक काल मान्य होगा।
साल 2026: कब और कहाँ दिखेंगे Grahan 2026 Dates?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण का लगना एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जिसका पृथ्वी और उस पर रहने वाले जीवों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वैदिक परंपराओं में इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है और इसके दौरान विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साल 2026 में कुल चार ग्रहण घटित होंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। इन ग्रहणों की तिथियां और भारत में इनकी दृश्यता जानना आवश्यक है ताकि आप ज्योतिषीय उपायों और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी कर सकें।
Grahan 2026 Dates: ग्रहण के प्रकार और उनका ज्योतिषीय महत्व
ग्रहण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है। वहीं, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँच पाता। इन घटनाओं को ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता और इनके दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान Sutak Kaal का विशेष महत्व होता है, जिसमें शुभ कार्यों और देवी-देवताओं के स्पर्श से बचने की सलाह दी जाती है।
भारत में ग्रहण की दृश्यता और Sutak Kaal की वैधता के आधार पर ही धार्मिक और ज्योतिषीय नियमों का पालन किया जाता है। यदि ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, तो आमतौर पर Sutak Kaal भी मान्य नहीं होता, हालांकि कुछ क्षेत्रों में मानसिक प्रभाव के लिए सावधानी बरती जाती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
साल 2026 के सूर्य ग्रहण की तिथियां और दृश्यता
साल 2026 में दो सूर्य ग्रहण लगेंगे, जिनका विवरण नीचे दी गई तालिका में प्रस्तुत है:
साल 2026 के चंद्र ग्रहण की तिथियां और दृश्यता
वर्ष 2026 में दो चंद्र ग्रहण भी होंगे, जिनकी जानकारी इस प्रकार है:
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें
ग्रहण काल को लेकर ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना श्रेयस्कर होता है:
- ग्रहण शुरू होने से पहले ही सभी खाने-पीने की चीजों में तुलसी दल या कुश डाल दें।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने और ग्रहण देखने से बचना चाहिए।
- ग्रहण काल में ईश्वर का ध्यान करें, मंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
- ग्रहण के दौरान भोजन पकाना, खाना, सोना, बाल काटना, नाखून काटना और सिलाई का काम वर्जित माना गया है।
- मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों का स्पर्श नहीं किया जाता।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
निष्कर्ष और उपाय
ग्रहण का समय आत्मचिंतन और साधना के लिए उपयुक्त होता है। यह हमें प्रकृति के नियमों और ब्रह्मांडीय शक्तियों की याद दिलाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए स्नान के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। शिव मंत्रों का जाप, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ और इष्टदेव के नाम का स्मरण ग्रहण काल में विशेष फलदायी होता है। इन नियमों का पालन करके हम ग्रहण के अशुभ प्रभावों से बच सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।



