



Holi 2026: भारतीय संस्कृति में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह आत्मशुद्धि, प्रेम और भक्ति के जागरण का पावन पर्व है।
Holi 2026: आत्मिक शुद्धि और भक्ति के रंग में रंगने का महापर्व
होली 2026: एक आध्यात्मिक यात्रा
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन और अगले दिन प्रतिपदा को रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अहंकार के नाश और प्रेम की विजय का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। होलिका दहन की अग्नि हमें यह संदेश देती है कि जिस प्रकार भक्त प्रह्लाद की भक्ति अग्नि में भी अडिग रही, उसी प्रकार हमें भी अपनी श्रद्धा और विश्वास पर अडिग रहना चाहिए।
पौराणिक कथा और आध्यात्मिक महत्व
होली की जड़ें गहरी पौराणिक कथाओं में निहित हैं। हिरण्यकशिपु नामक दैत्यराज ने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया था और सभी को अपनी पूजा करने का आदेश दिया था। किंतु उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अनेकों यातनाएं दीं, परंतु वह अपनी भक्ति से विचलित नहीं हुआ। अंततः हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। परंतु भगवान विष्णु की कृपा से होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहा। यह घटना हमें बताती है कि धर्म और सत्य की विजय सदैव होती है। यह केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन के गहरे आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करती है।
होली के दिन लोग अपने मन की कटुता और वैमनस्य को भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पूजन विधि और साधना
होलिका दहन की रात्रि में विशेष पूजन और साधना का महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय व्यक्ति के कष्टों को दूर करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- होलिका दहन से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा सामग्री (जैसे रोली, चावल, फूल, कच्चा सूत, गुड़, बताशे, नई फसल के दाने) तैयार करें।
- होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठें।
- जल, रोली, चावल, फूल आदि से होलिका का पूजन करें।
- कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार लपेटते हुए परिक्रमा करें।
- अपनी मनोकामनाएं होलिका माता से कहें।
- अग्नि प्रज्वलित होने के बाद उसमें नई फसल के दाने और अपनी बुराइयों का प्रतीक कुछ पुराना वस्तु (जैसे सूखे पत्ते) अर्पित करें।
होली 2026: मंत्र साधना
होलिका दहन के समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। ये मंत्र नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता का संचार करते हैं।
ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं होलिका देव्यै नमः।
अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।।
यह मंत्र हमें भय से मुक्ति और समृद्धि प्रदान करने वाली होलिका माता की स्तुति करता है। यह आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व है, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
निष्कर्ष और उपचारात्मक उपाय
होली का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ क्यों न आएं, यदि हमारा विश्वास दृढ़ हो तो हम हर बाधा को पार कर सकते हैं। इस दिन अपने ईष्ट देवता का स्मरण करें, गरीबों को भोजन कराएं और दान-पुण्य करें।
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