



Jeevika Didi: गांव की धड़कन, बदलाव की पहचान जीविका दीदियों के सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, जहां एक विधायक के सवाल पर मंत्री का जवाब कई सवालों को जन्म दे गया। यह सिर्फ एक पहचान पत्र या ड्रेस कोड का मसला नहीं, बल्कि उन लाखों महिलाओं के स्वाभिमान और सुरक्षा से जुड़ा है, जो ग्रामीण बिहार की तस्वीर बदल रही हैं।
Jeevika Didi: पहचान से जुड़ी सुरक्षा की चुनौती
सासाराम से विधायक स्नेहलता कुशवाहा ने हाल ही में बिहार विधानसभा में एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उनका सवाल जीविका दीदियों की विशिष्ट पहचान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर था। उन्होंने सुझाव दिया कि इन दीदियों को एक विशेष पहचान पत्र (आईडी कार्ड) और एक निर्धारित ड्रेस कोड प्रदान किया जाए, ताकि वे अपनी सेवाएं देते समय आसानी से पहचानी जा सकें और सुरक्षित महसूस कर सकें। ग्रामीण बिहार में आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जीविका दीदियां विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और कार्यस्थल पर उनकी पहचान एक गंभीर विषय है।
विधायक का सवाल, मंत्री का जवाब
विधायक स्नेहलता कुशवाहा के प्रश्न पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने जो जवाब दिया, वह सदन में कई लोगों के लिए अप्रत्याशित था। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में जीविका दीदियों के लिए कोई विशिष्ट ड्रेस कोड या पहचान पत्र जारी करने की योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि जीविका दीदियां अपने गांव और समाज में अपनी गतिविधियों के माध्यम से पहले से ही जानी जाती हैं। मंत्री के इस जवाब ने सदन के अंदर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है। कई जानकारों का मानना है कि इस तरह का कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव ला सकता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जीविका कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और आजीविका के अवसरों को बढ़ाना है, बिहार में लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुका है। इन दीदियों को अक्सर दूरदराज के इलाकों में जाकर काम करना पड़ता है, जहां उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीण विकास मंत्री का रुख
मंत्री श्रवण कुमार के बयान ने सरकार के मौजूदा रुख को स्पष्ट कर दिया है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या भविष्य में जीविका दीदियों की पहचान और सुरक्षा को लेकर कोई नीतिगत बदलाव किया जाएगा। विधायकों और जनता के एक वर्ग का तर्क है कि एक निर्धारित पहचान और ड्रेस कोड न केवल उनकी सुरक्षा में सहायक होगा, बल्कि उनके काम में व्यावसायिकता भी लाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह उन्हें सरकारी कर्मियों के समान एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा, जिससे उन्हें समाज में और भी अधिक सम्मान मिलेगा। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इससे उनके खिलाफ होने वाले किसी भी अनचाहे व्यवहार को रोकने में मदद मिलेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, जीविका दीदियों को बिना किसी विशेष पहचान या ड्रेस कोड के ही अपने कार्यों को जारी रखना होगा। हालांकि, विधानसभा में इस मुद्दे का उठना दर्शाता है कि यह विषय कितना महत्वपूर्ण है और इस पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है। सरकार पर इस दिशा में सोचने का दबाव बना रहेगा, खासकर जब ग्रामीण विकास और महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। भविष्य में इस संबंध में क्या निर्णय लिए जाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।



