



India-US Trade Deal: एक ऐसा तूफ़ान, जो न सिर्फ तटों पर दस्तक दे रहा है, बल्कि देश के अंदरूनी हिस्सों तक अपनी छाप छोड़ रहा है। भारत के व्यापारिक समीकरणों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने और ‘भारत माता’ को बेचने का गंभीर आरोप लगाया। लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान गांधी ने कहा कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि विश्व एक गंभीर वैश्विक संकट का सामना कर रहा है, जहाँ एक महाशक्ति का युग समाप्त हो रहा है, भू-राजनीतिक संघर्ष तीव्र हो रहे हैं, और ऊर्जा एवं वित्त का शस्त्रीकरण किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राहुल गांधी के गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस कड़वी वास्तविकता को स्वीकार करने के बावजूद, सरकार ने संयुक्त राज्य अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों को इस प्रकार इस्तेमाल करने की अनुमति दी है जिससे भारत भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब अमेरिका कहता है कि हम किसी विशेष देश से तेल नहीं खरीद सकते, तो इसका सीधा मतलब है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हो रही है – यानी ऊर्जा का ही हमारे खिलाफ गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया, “क्या आपको इस पर शर्म नहीं आती? मैं कह रहा हूँ कि आपने भारत के हितों से समझौता किया है। क्या आपको अपने इस कृत्य पर कोई शर्म नहीं है? ऐसा लगता है जैसे आपने ‘भारत माता’ को बेच दिया हो।”
प्रधानमंत्री मोदी पर ‘दबाव’ का आरोप
प्रधानमंत्री मोदी पर एक और तीखा हमला बोलते हुए गांधी ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थितियों में भारत को बेचेंगे, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उन पर बाहरी दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की आँखों में स्पष्ट भय दिखाई दे रहा था। “एपस्टीन फाइलों” को गुप्त रखे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने गुप्त दबावों की ओर इशारा किया। राहुल गांधी ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थितियों में भारत को नहीं बेचेंगे। आप जानते हैं उन्होंने भारत को क्यों बेचा? क्योंकि वे उनका गला घोंट रहे हैं। उन्होंने उनकी गर्दन पर शिकंजा कस रखा है… हम प्रधानमंत्री की आंखों में डर देख सकते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दो बातें हैं – पहली, एपस्टीन का मामला। 30 लाख फाइलें अभी भी बंद हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शुल्क को लेकर चिंता जताते हुए गांधी ने कहा कि औसत शुल्क लगभग 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है, यानी यह छह गुना वृद्धि है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि भारत में अमेरिकी आयात 46 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 146 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। उन्होंने इस स्थिति को “बेतुका” बताते हुए आरोप लगाया कि भारत बिना किसी ठोस प्रतिबद्धता के प्रतिवर्ष लगभग 100 अरब डॉलर का आयात बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि दूसरा, आपने शुल्क पर क्या किया है? पहले औसत शुल्क लगभग 3 प्रतिशत था। अब यह बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है – छह गुना वृद्धि। साथ ही, भारत में अमेरिकी आयात 46 अरब डॉलर से बढ़कर 146 अरब डॉलर होने का अनुमान है। यह बेतुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




