



Bihar Budget Session: लोकतंत्र के मंदिर में जब जनहित के सवाल गूंजे, तो सियासी पारा चढ़ना स्वाभाविक है। बिहार के सियासी अखाड़े में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब बजट सत्र का सातवां दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी तकरार की भेंट चढ़ गया।
बिहार बजट सत्र: राशन वितरण में अनियमितता पर गरमाई बहस
बिहार विधानमंडल के वर्तमान बजट सत्र के सातवें दिन सदन की कार्यवाही हंगामे और शोरगुल से बाधित रही। विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद में भी बहस की तपिश साफ महसूस की गई। मुख्य मुद्दा था राशन व्यवस्था, यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में कथित गड़बड़ियां, जिस पर विपक्ष ने सरकार को जमकर घेरा। विपक्ष ने इन अनियमितताओं को एक बड़े पीडीएस घोटाला का हिस्सा बताते हुए तत्काल जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
सदन में सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया कि कैसे गरीबों के हक का राशन बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ से बाजार में बेचा जा रहा है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा। इस खींचतान के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य रुक गए, और सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले ही स्थगित करनी पड़ी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति दर्शाती है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
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विधानसभा और विधान परिषद दोनों जगह दिखा सियासी घमासान
यह केवल विधानसभा ही नहीं थी, जहाँ हंगामा बरपा। विधान परिषद में भी राशन वितरण प्रणाली की खामियों को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्षी सदस्यों ने आंकड़ों और तथ्यों के साथ अपनी बात रखने की कोशिश की, जबकि सरकार की ओर से संबंधित मंत्री ने व्यवस्था को सुचारू बनाने के दावे किए। हालांकि, विपक्ष इन दावों से संतुष्ट नहीं दिखा और सदन के भीतर लगातार नारेबाजी जारी रही।
इस सियासी घमासान ने सत्र के महत्व पर सवालिया निशान लगा दिया है। जहां जनता उम्मीद करती है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे, वहीं इस तरह का गतिरोध विकास कार्यों को प्रभावित करता है। सरकार को इन गंभीर आरोपों पर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


