



Mumbai Real Estate: आमतौर पर मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक घर खरीदना और फिर उसके भारी मेंटिनेंस खर्चों को वहन करना किसी चुनौती से कम नहीं होता, लेकिन क्या हो अगर आपकी हाउसिंग सोसाइटी आपको हर साल लाखों रुपये वापस लौटाने लगे? जी हां, साउथ मुंबई के एक प्रीमियम आवासीय परिसर में यही अनोखा मॉडल सामने आया है, जहां फ्लैट मालिक मेंटिनेंस देने के बजाय सोसाइटी से सालाना अच्छी खासी रकम प्राप्त कर रहे हैं। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि आय का एक स्थायी स्रोत बन गया है, जो पारंपरिक रियल एस्टेट धारणाओं को चुनौती दे रहा है।
साउथ मुंबई में ‘मुंबई रियल एस्टेट’ का अजब-गजब किस्सा: जहां सोसाइटी मेंटिनेंस लेती नहीं, बल्कि देती है लाखों!
‘मुंबई रियल एस्टेट’ में क्यों और कैसे मिल रहा पैसा?
यह चौंकाने वाली खबर कुफे परेड स्थित प्रसिद्ध ‘जॉली मेकर’ रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स से जुड़ी है। दावा किया जा रहा है कि यह सोसाइटी अपने सभी परिचालन खर्चों—जैसे सुरक्षा, कर्मचारियों के वेतन, लिफ्ट का रखरखाव, सामान्य क्षेत्रों की बिजली और सफाई—को वहन करने के बाद भी एक बड़े सरप्लस में रहती है। इस अतिरिक्त आय को ही हर साल फ्लैट मालिकों के बीच 2.5 से 3 लाख रुपये तक ‘डिविडेंड’ के रूप में वितरित किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मॉडल एक असाधारण रियल एस्टेट निवेश रणनीति का प्रमाण है।
इस अप्रत्याशित दावे को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कंटेंट क्रिएटर विशाल भार्गव ने एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो में सामने रखा। उनके अनुसार, कहानी 1970 के दशक की है, जब इस प्रोजेक्ट के फ्लैट बेचे जा रहे थे। तब खरीदारों को एक विशेष ऑफर दिया गया था: फ्लैट की कीमत के अतिरिक्त 40% राशि का भुगतान करके नरीमन प्वाइंट में एक वाणिज्यिक संपत्ति (कमर्शियल प्रॉपर्टी) में हिस्सेदारी लेने का विकल्प।
यही वाणिज्यिक संपत्ति आज सोसाइटी के लिए सोने की खान साबित हो रही है। बताया जाता है कि यह संपत्ति प्रतिमाह लगभग 50 लाख रुपये का भारी किराया उत्पन्न करती है। इसी विशाल कमाई से सोसाइटी का पूरा मेंटिनेंस खर्च आसानी से निकल जाता है, और जो रकम बचती है, उसे सालाना फ्लैट मालिकों में बांट दिया जाता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
भविष्य के रियल एस्टेट मॉडल्स की ओर इशारा?
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इस वीडियो को पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने भी साझा करते हुए कहा था कि “आप इस गणित को नहीं समझेंगे, लेकिन यह सच है।” यह टिप्पणी इस मॉडल की विश्वसनीयता को और बढ़ाती है।
अगर यह अनोखा मॉडल पूरी तरह से सही साबित होता है, तो यह दर्शाता है कि दूरदर्शी रियल एस्टेट निवेश और आवासीय व वाणिज्यिक संपत्तियों के मिश्रित ढाँचे किस तरह लंबे समय में असाधारण रिटर्न दे सकते हैं। यह उन डेवलपर्स और निवेशकों के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक हाउसिंग सोसाइटी ढांचे से हटकर कुछ अलग और लाभदायक बनाना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह जॉली मेकर सोसाइटी सिर्फ एक रहने की जगह नहीं, बल्कि एक वित्तीय चमत्कार है, जो भारत के रियल एस्टेट बाजार में नवाचार की नई परिभाषा गढ़ रही है।



