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फ़रवरी, 12, 2026
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Anganwadi Workers Protest in Bhagalpur: चावल कटौती और इंक्रीमेंट पर ‘हल्ला बोल’, सेविकाओं ने जिलाधिकारी को पत्र लिख गिनाईं अपनी समस्याएं

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Anganwadi workers protest: जिनके कंधों पर नौनिहालों के पोषण और भविष्य की नींव रखने का जिम्मा है, आज वही अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रही हैं। भागलपुर में आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और जिलाधिकारी को एक विस्तृत पत्र सौंपकर अपनी समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की गुहार लगाई है।

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क्यों हो रहा है Anganwadi workers protest, जानें पूरा मामला

बिहार आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने भागलपुर जिलाधिकारी के समक्ष सेविकाओं की दो प्रमुख समस्याओं को रखा है, जिनका समाधान वर्षों से नहीं हो पाया है। संघ के अनुसार, ये समस्याएं न केवल सेविकाओं के मनोबल को तोड़ रही हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधा उत्पन्न कर रही हैं। पहला मुद्दा केंद्रों पर भेजे जाने वाले चावल की आपूर्ति में भारी गड़बड़ी से जुड़ा है, तो दूसरा मुद्दा वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का है।

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संघ द्वारा दिए गए पत्र में चावल आपूर्ति के गणित को विस्तार से समझाया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पत्र के अनुसार, प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर हर महीने 178.943 किलोग्राम चावल की खपत होती है। विभाग द्वारा एक बार में तीन महीने का चावल भेजा जाता है, जो कुल 536.829 किलोग्राम होना चाहिए। लेकिन इसकी जगह परियोजनाओं से 9 या 10 बोरे चावल ही दिए जाते हैं, जिनका कुल वजन 450 से 500 किलो के बीच होता है।

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  • 9 बोरा आपूर्ति होने पर: प्रति तिमाही 86.829 किलोग्राम चावल कम मिलता है।
  • 10 बोरा आपूर्ति होने पर: प्रति तिमाही 36.829 किलोग्राम चावल कम मिलता है।
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यही नहीं, बोरों में भी वजन पूरा नहीं होता और अक्सर 50 किलो की जगह केवल 45 से 48 किलो चावल ही निकलता है। इस कटौती का सीधा असर बच्चों को दिए जाने वाले पोषण पर पड़ रहा है।

वर्षों से लंबित है इंक्रीमेंट का भुगतान

सेविकाओं की दूसरी बड़ी समस्या उनके मानदेय से जुड़ी है। आईसीडीएस, पटना के निदेशक द्वारा 2 जुलाई 2016 को जारी एक पत्र के अनुसार, सभी सेविकाओं को एक निश्चित सेवा अवधि के बाद इंक्रीमेंट दिए जाने का प्रावधान है। इसके तहत 5 वर्ष की सेवा पूरी होने पर 51 रुपये, 10 वर्ष पर 63 रुपये और 15 वर्ष की सेवा के बाद 90 रुपये प्रति माह की वृद्धि मिलनी थी। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि जिले की किसी भी सेविका को उनकी नियुक्ति के बाद से आज तक इस इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिला है। अपनी इन Anganwadi demands को लेकर सेविकाएं लंबे समय से आवाज उठा रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। संघ ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि वे इन दोनों गंभीर विषयों पर तत्काल संज्ञान लें और सुनिश्चित करें कि सेविकाओं को उनका हक़ मिले। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस मामले में अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संघ आंदोलन की राह पकड़ सकता है।

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