



Motorcycle Theft: बेनीपुर में चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे सरकारी अस्पतालों को भी अपना निशाना बनाने से नहीं चूक रहे। इलाज कराने आए एक मरीज की मोटरसाइकिल दिनदहाड़े अस्पताल परिसर से गायब हो गई, जिससे हड़कंप मच गया।
यह घटना बुधवार को बेनीपुर अनुमंडल अस्पताल परिसर में घटी, जब जयंतीपुरदाथ निवासी प्रदीप कुमार यादव अपना इलाज कराने अस्पताल आए थे। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल परिसर में खड़ी की और डॉक्टर से मिलने चले गए। जब वे इलाज कराकर वापस लौटे, तो उन्होंने पाया कि उनकी मोटरसाइकिल अपनी जगह से नदारद थी। काफी देर तक खोजबीन करने के बाद भी जब बाइक का कुछ पता नहीं चला, तो उन्होंने बहेड़ा थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।
अस्पताल में बढ़ती Motorcycle Theft की घटनाएं, प्रशासन बना मूकदर्शक
यह कोई पहली घटना नहीं है जब अनुमंडल अस्पताल परिसर से किसी की बाइक चोरी हुई हो। पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोगों ने आशंका जाहिर की है कि यहां कोई बड़ा चोर गिरोह सक्रिय है, जो मौका देखते ही वाहनों पर हाथ साफ कर देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चिंता की बात यह है कि इन बढ़ती घटनाओं के बावजूद न तो स्थानीय पुलिस प्रशासन और न ही अस्पताल प्रबंधन इस समस्या को लेकर कोई गंभीरता दिखा रहा है।
अस्पताल में यूं तो दर्जन भर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, लेकिन आरोप है कि अस्पताल प्रशासन इन गार्ड्स का उपयोग केवल अपनी और डॉक्टरों की सुरक्षा में ही करता है। आम लोगों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल प्रबंधन रोस्टर के अनुसार मोटरसाइकिल स्टैंड पर गार्ड की ड्यूटी लगा दे, तो चोरी की इन घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लग सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
अधीक्षक ने बताई अपनी लाचारी, सुरक्षा पर उठे सवाल
जब इस मामले पर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. कुमारी भारती से बात की गई, तो उन्होंने अपनी लाचारी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोटरसाइकिल स्टैंड के चारों ओर घेराबंदी नहीं होने के कारण पूरा परिसर असुरक्षित है और चोर आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। उनके इस बयान से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सवाल यह है कि अगर परिसर असुरक्षित है, तो उसे सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?




