



Vijaya Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और सभी व्रतों में इसे अत्यंत पवित्र तथा फलदायी माना गया है। हर माह में दो एकादशियां पड़ती हैं, जिनमें से एक विजया एकादशी का अपना विशेष महत्व है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है और जीवन में सफलता के द्वार खोलता है। विजया एकादशी व्रत के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर खान-पान से संबंधित नियमों का। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि आप पहली बार यह व्रत कर रहे हैं या इसके नियमों से अनभिज्ञ हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
विजया एकादशी व्रत के नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं, जानें संपूर्ण विधि
विजया एकादशी का व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। इस दिन व्रत के दौरान अन्न का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है। हालांकि, कुछ विशेष खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन आप फलाहार के रूप में कर सकते हैं। इस व्रत का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है और इसके सही पालन से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
विजया एकादशी व्रत के दौरान इन नियमों का करें पालन
विजया एकादशी के पावन अवसर पर व्रतधारियों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। ये नियम न केवल शारीरिक शुद्धि के लिए बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति के लिए भी आवश्यक हैं:
- **वर्जित खाद्य पदार्थ:**
- चावल, दाल, गेहूं, बाजरा जैसे अनाज का सेवन पूरी तरह से मना है।
- लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- मांसाहार और अंडे का सेवन बिल्कुल वर्जित है।
- सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करें।
- शराब, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।
- मसूर की दाल और चने की दाल भी वर्जित मानी जाती है।
- **सेवन योग्य खाद्य पदार्थ (फलाहार):**
- फल: सेब, केला, अंगूर, संतरा, अनार जैसे ताजे फल खा सकते हैं।
- सब्जियां: आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू, लौकी जैसी जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियों का सेवन कर सकते हैं (लेकिन प्याज-लहसुन से बचें)।
- दूध और डेयरी उत्पाद: दूध, दही, पनीर, छाछ का सेवन किया जा सकता है।
- ड्राई फ्रूट्स: बादाम, अखरोट, किशमिश का सेवन कर सकते हैं।
- कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल (मोरधन) से बने व्यंजन खा सकते हैं।
- पानी और फलों के रस का पर्याप्त सेवन करें ताकि शरीर में जल की कमी न हो।
विजया एकादशी का व्रत केवल भोजन त्याग का नाम नहीं है, बल्कि यह इंद्रियों पर नियंत्रण और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस दिन सत्य बोलना, क्रोध न करना और मन को शांत रखना भी व्रत का ही एक अंग है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
निष्कर्ष और उपाय
विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के साथ इन नियमों का पालन करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। व्रत के पारण के समय भी नियमों का ध्यान रखना चाहिए और द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में ही पारण करना चाहिए। दान-पुण्य करना इस दिन विशेष फलदायी होता है। विजया एकादशी का व्रत करने से साधक को जीवन में विजय, धन और सुख की प्राप्ति होती है, जो इसके धार्मिक महत्व को और बढ़ा देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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