



महाशिवरात्रि 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह पावन तिथि है जब सृष्टि के रचयिता भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे, और इसी दिन माता पार्वती से उनका विवाह भी संपन्न हुआ था। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष संयोग के साथ आ रहा है, जो इसे और भी फलदायी बना रहा है।
महाशिवरात्रि 2026: दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि योग में शिव आराधना का अलौकिक महत्व
इस वर्ष, 17 फरवरी 2026 को पड़ने वाली महाशिवरात्रि, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ मनाई जाएगी। यह योग अपने आप में अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है, जिसमें किए गए सभी कार्य, विशेषकर धार्मिक अनुष्ठान, अवश्य सिद्ध होते हैं। भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए यह दिन एक स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं, और जीवन से सभी कष्टों का निवारण होता है।
महाशिवरात्रि 2026 का पावन पर्व और सर्वार्थ सिद्धि योग
प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह महान पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव महिमा का गुणगान करते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ इस शिवरात्रि का आगमन, पूजा के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। यह योग विशेष रूप से नए कार्यों की शुरुआत, मंत्र सिद्धि और किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इस दिन शिव का जलाभिषेक करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि पूजा विधि
- प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिव मंदिर में जाकर या घर पर ही शिव प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
- हाथ में जल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल, कनेर के फूल आदि शिव को अर्पित करें।
- चंदन का लेप लगाएं और धूप-दीप जलाएं।
- फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- रात्रि जागरण कर शिव भजन और कीर्तन करें।
- अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें।
शुभ मुहूर्त (महाशिवरात्रि 2026)
महाशिवरात्रि 2026, मंगलवार, 17 फरवरी को मनाई जाएगी।
| पर्व | तिथि | पूजा का समय |
|---|---|---|
| महाशिवरात्रि | 17 फरवरी 2026 | सायं काल से रात्रि भर (निशीथ काल पूजा विशेष) |
(नोट: निशीथ काल पूजा का विशेष महत्व है, यह मध्यरात्रि का समय होता है।)
महाशिवरात्रि और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था और ब्रह्मांड का सृजन, पालन और संहार किया था। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक भी है। सर्वार्थ सिद्धि योग का इसमें समावेश इस शिवरात्रि पर्व को और भी अधिक शक्तिशाली बना देता है। इस योग में की गई साधना व्यक्ति के सभी मनोरथ सिद्ध करती है और उसे मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। यह एक ऐसा अद्भुत योग है जो अशुभ ग्रहों के प्रभाव को भी कम कर देता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिव मंत्र
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी होता है।
ॐ नमः शिवाय॥
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
निष्कर्ष और उपाय
महाशिवरात्रि 2026 का यह अद्भुत संयोग भक्तों के लिए असीम पुण्य कमाने का अवसर है। इस दिन भगवान शिव की सच्चे हृदय से की गई आराधना जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाती है। समस्त दुखों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। शिव मंदिरों में जाकर दीपक जलाएं और धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें ताकि आप अन्य महत्वपूर्ण पर्वों के बारे में भी जान सकें। यह पर्व हमें आंतरिक शुद्धता और भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।




