



Mahashivratri 2026: सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर होता है। वर्ष 2026 में, यह पावन पर्व एक विशेष संयोग के साथ आ रहा है, जहाँ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो शिव आराधना के फल को कई गुना बढ़ा देगा। इस पवित्र दिन पर शिव भक्त उपवास रखते हैं और विधि-विधान से महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं।
महाशिवरात्रि 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग में शिव आराधना का अलौकिक महत्व
देवों के देव महादेव को समर्पित महाशिवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, जिसे संपूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष Mahashivratri 2026 पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इस दिन की महत्ता को और भी अधिक बढ़ा देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए सभी शुभ कार्य सफल होते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक ऐसा समय है जब भक्त अपनी सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव का अभिषेक और पूजन करते हैं।
Mahashivratri 2026 पर शिव आराधना का विशेष अवसर
वर्ष 2026 में, महाशिवरात्रि का पावन पर्व 19 फरवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से महाशिवरात्रि व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पावन अवसर भक्तों को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से अत्यधिक फल की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| अवसर | समय |
|---|---|
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 18 फरवरी 2026, रात्रि 09:39 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 19 फरवरी 2026, सायं 07:44 बजे |
| निशिता काल पूजा | 19 फरवरी 2026, मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे तक (अवधि: 50 मिनट) |
महाशिवरात्रि पूजा विधि
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि के दिन इन विधि-विधानों का पालन करें:
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गन्ने का रस और बेलपत्र से अभिषेक करें।
- भगवान को धतूरा, भांग, शमी पत्र, चंदन, अक्षत, सफेद फूल (जैसे मदार) अर्पित करें।
- भगवान शिव को फल, मिठाई और विशेष रूप से मौसमी फलों का भोग लगाएं।
- धूप और दीप प्रज्ज्वलित करें और महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें।
- रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में अभिषेक और पूजा-अर्चना करें।
- अगले दिन सुबह स्नान कर शिवजी को भोग लगाकर व्रत का पारण करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
महाशिवरात्रि का महत्व और शिव मंत्र
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। इस दिन शिव मंत्रों का जाप करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है। यह पावन दिन सभी भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी होता है, जो उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की ओर ले जाता है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
यह महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसका जाप करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष और उपाय
महाशिवरात्रि 2026 पर सर्वार्थ सिद्धि योग में शिव आराधना करने से सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं। इस दिन दान-पुण्य करना, गरीबों को भोजन कराना और शिवालय में दीप प्रज्ज्वलित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पवित्र अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक करें और निष्ठा भाव से उनकी भक्ति करें। ऐसा करने से महादेव आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे और जीवन को सुख-समृद्धि से भर देंगे। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें


