



Bhagalpur News: विकास की बयार जब बिना दस्तक दिए किसी के आशियाने पर दस्तक देती है, तो बवाल होना लाजिमी है। भागलपुर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां प्रस्तावित ओवरब्रिज के निर्माण ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर उन्हें बिना किसी सूचना के उजाड़ने की तैयारी चल रही है।
Bhagalpur News: जानिए क्या है पूरा मामला?
मामला भागलपुर के शिवपुरी-कैलाशपुरी स्थित बाबा बासुकीनाथ कॉलोनी के पास का है। यहां शीतला स्थान चौक से बाईपास तक एक ओवरब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है। इस निर्माण को लेकर छत्रपति शिवा कैलाश बासुकी समाज सेवा समिति के बैनर तले चार मोहल्लों के निवासी एकजुट हो गए हैं और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं और ओवरब्रिज बनने से इलाके को फायदा ही होगा, लेकिन जिस तरीके से यह सब किया जा रहा है, वह सरासर गलत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका आरोप है कि जिस जमीन पर वे दशकों से रह रहे हैं और छोटे-मोटे व्यवसाय चलाकर अपना परिवार पाल रहे हैं, उसका भूमि अधिग्रहण बिना किसी नोटिस या संवाद के किया जा रहा है।
लोगों में गुस्सा इस बात को लेकर है कि उन्हें इस पूरी कार्रवाई की जानकारी सीधे मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली, जिसमें खाता-खेसरा का विवरण दिया गया था। किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने मौके पर आकर उनसे बात करना या उन्हें विश्वास में लेना जरूरी नहीं समझा। इस अनिश्चितता ने लोगों के मन में डर और असमंजस का माहौल पैदा कर दिया है।
बिना नोटिस, बिना मुआवजा कैसा विकास?
स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक और लिखित नोटिस नहीं दिया जाता, तब तक वे अपनी एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। उनकी प्रमुख मांगों में प्रभावित परिवारों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना, मुआवजे की राशि स्पष्ट करना और उनके पुनर्वास के लिए एक ठोस योजना बनाना शामिल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लोगों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उनके घरों से नहीं हटाया जा सकता।
समिति के सदस्यों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने पर मजबूर होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों की बेचैनी और भी बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और कैसे विकास कार्यों तथा स्थानीय निवासियों के अधिकारों के बीच एक संतुलन स्थापित करता है।

