



Darbhanga News: न्याय का तराजू जब तौलता है तो बड़े-बड़े सूरमा भी पानी भरते नजर आते हैं। दरभंगा के न्यायालय में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां दो संगीन मामलों में आरोपियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया और अदालत ने उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
Darbhanga News: अग्रिम जमानत याचिका खारिज, सलाखों के पीछे जाने का खतरा बढ़ा
दरभंगा सिविल कोर्ट स्थित अपर सत्र न्यायाधीश-सप्तम, श्री उपेन्द्र कुमार की अदालत ने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में सुनवाई करते हुए आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। लोक अभियोजक अमरेन्द्र नारायण झा द्वारा प्रस्तुत दलीलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। पहला मामला बहेड़ी थाना कांड संख्या 22/25 से जुड़ा है, जो रिश्ते को शर्मसार करने वाली एक हत्या की वारदात है। इस गंभीर आपराधिक मामले में, मृतका मुनमुन कुमारी की अपनी ही सगी बहन अर्चना कुमारी पर हत्या का आरोप है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अर्चना कुमारी ने अपने पति संतोष कुमार चन्द्रवंशी और एक अन्य सहयोगी विभिषण कुमार के साथ मिलकर पहले मुनमुन कुमारी की हत्या की और फिर सबूत मिटाने की नीयत से शव को जला दिया। इस मामले में आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मुख्य आरोपी अर्चना कुमारी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। अब आरोपी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
जानलेवा हमले के आरोपी को भी नहीं मिली बेल
वहीं, दूसरे मामले में अदालत ने लहेरियासराय थाना कांड संख्या 598/25 के आरोपी की जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी। यह मामला जानलेवा हमले से संबंधित है। आरोपी अमित कुमार सिंह पर गंभीर मारपीट और हमला करने का आरोप है। लोक अभियोजक अमरेन्द्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि आरोपी को जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और पीड़ित पक्ष असुरक्षित महसूस करेगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ गंभीर साक्ष्य मौजूद हैं। इसी आधार पर अमित कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। न्यायालय के इस कड़े रुख से जिले के अपराधियों में एक स्पष्ट संदेश गया है कि संगीन अपराधों के आरोपियों को आसानी से राहत नहीं मिलेगी। अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगीन मामलों में न्याय प्रक्रिया पूरी गंभीरता से काम कर रही है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


