



Retail Inflation: भारत में खुदरा महंगाई के नए आंकड़ों ने आर्थिक विशेषज्ञों और आम जनता दोनों को चौंकाया है। जनवरी महीने के लिए जारी इन आंकड़ों में महंगाई दर 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इस बार खास बात यह है कि यह आंकड़ा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की एक नई श्रृंखला के आधार पर तैयार किया गया है, जिसने महंगाई के आकलन के तरीके और दायरे दोनों को बदल दिया है। पहले जहां गणना का आधार वर्ष 2012 था, वहीं अब इसे बदलकर 2024 कर दिया गया है। यह संशोधन देश की आर्थिक नब्ज को समझने के लिए कितना अहम है, आइए जानते हैं।
# खुदरा महंगाई: नए आधार वर्ष से बदली तस्वीर, जानिए क्या हुए बदलाव
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी इस नई श्रृंखला में उपभोक्ता खर्च के बदलते पैटर्न को ध्यान में रखते हुए कई अहम संशोधन किए गए हैं। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिति की अधिक सटीक तस्वीर पेश करना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके लिए, वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़ाकर 308 कर दी गई है, जबकि सेवाओं की संख्या 40 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है। यह विस्तार यह सुनिश्चित करता है कि लोगों के वास्तविक उपभोग व्यवहार को बेहतर ढंग से दर्शाया जा सके और महंगाई का आकलन जमीनी हकीकत के करीब हो।
## बदलते उपभोग पैटर्न और खुदरा महंगाई पर असर
जनवरी में खाद्य मुद्रास्फीति 2.13 प्रतिशत रही, जो कुल महंगाई दर से भी कम है। नई श्रृंखला में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए कई नए मदों को शामिल किया गया है, जो आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप हैं।
**मुख्य बदलाव और नए शामिल किए गए मद:**
* ग्रामीण मकान किराया: ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते शहरीकरण और किराए के घरों की बढ़ती मांग को दर्शाने के लिए।
* ऑनलाइन मीडिया सेवाएं: डिजिटल मनोरंजन की बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए।
* सीएनजी/पीएनजी: शहरी परिवहन और रसोई गैस के रूप में इनकी बढ़ती खपत।
* टेलीफोन शुल्क, रेल और हवाई किराया: डिजिटल और प्रशासनिक स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के बेहतर उपयोग के लिए।
* डाक शुल्क, ईंधन और ओटीटी सब्सक्रिप्शन: ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
ये बदलाव उपभोक्ताओं की बदलती जीवनशैली और डिजिटल सेवाओं पर उनकी बढ़ती निर्भरता को बखूबी दर्शाते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
## पुरानी और नई श्रृंखला के आंकड़ों में अंतर
तुलना के लिए, वर्ष 2012 को आधार मानने वाली पुरानी श्रृंखला के तहत जनवरी 2025 में खुदरा महंगाई 4.26 प्रतिशत थी, जबकि दिसंबर में यह 1.33 प्रतिशत रही थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आधार वर्ष में बदलाव और वस्तुओं तथा सेवाओं की टोकरी (बास्केट) के पुनर्गठन के कारण नई और पुरानी श्रृंखला के आंकड़ों में अंतर दिखाई देना स्वाभाविक है। यह अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि आर्थिक संकेतकों का आकलन करने के लिए समय-समय पर पद्धतियों में संशोधन कितना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, नई सीपीआई श्रृंखला महंगाई के आकलन को अधिक व्यापक और वर्तमान उपभोग प्रवृत्तियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह आर्थिक नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए अधिक सटीक जानकारी प्रदान करेगी, जिससे बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

