



Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में बीते कारोबारी दिन एक बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली, जहां अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की कमजोर पड़ती उम्मीदों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव से आईटी कंपनियों की आय पर संभावित दबाव की आशंका ने निवेशकों को भारी बिकवाली के लिए मजबूर कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सिर्फ एक मामूली गिरावट नहीं, बल्कि बाजार की भविष्य की दिशा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है, खासकर तब जब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य लगातार बदल रहा है।
Stock Market: आईटी शेयरों की बिकवाली से बाजार में भारी गिरावट
हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 558.72 अंक यानी 0.66% गिरकर 83,674.92 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 716.97 अंक टूटकर 83,516.67 के स्तर तक आ गया था। वहीं एनएसई का निफ्टी 146.65 अंक यानी 0.57% फिसलकर 25,807.20 अंक पर बंद हुआ, जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस गिरावट का मुख्य कारण आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली रही, जिसने पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया।
शेयर बाजार में गिरावट के कारण और आईटी शेयरों का दबाव
बाजार में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों पर पड़ा गहरा दबाव रहा। दिग्गज आईटी कंपनियां जैसे टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में करीब 6% तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में भी नुकसान देखने को मिला। हालांकि, इस बिकवाली के बीच कुछ शेयरों ने मजबूती भी दिखाई, जिनमें बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एशियन पेंट्स, लार्सन एंड टुब्रो, भारती एयरटेल और टाटा स्टील शामिल रहे।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि अमेरिका में मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है, जिससे निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव से सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी कंपनियों की आय पर दबाव की आशंका ने भी बाजार को कमजोर किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर किया, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
व्यापक बाजार का हाल और सेक्टरों पर असर
व्यापक बाजार में भी कमजोरी का रुख रहा। बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.48% और स्मॉलकैप सूचकांक 0.28% गिरा। क्षेत्रीय सूचकांकों में ‘फोकस्ड आईटी’ में 5.40 प्रतिशत और आईटी खंड में 5.29% की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, तेल एवं गैस, ऊर्जा, सेवा और एफएमसीजी सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए, जो यह दर्शाता है कि यह गिरावट सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
गिरावट का असर टीसीएस पर खास तौर पर दिखा। कंपनी के शेयर में 5.41% की गिरावट के बाद उसका बाजार पूंजीकरण पहली बार 10 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया और कारोबार के अंत में यह 9,95,661.50 करोड़ रुपये रह गया। यह किसी भी दिग्गज कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है, जो निवेशकों के सेंटीमेंट को दर्शाता है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के सिद्धार्थ खेमका की मानें तो तीसरी तिमाही के नतीजों का दौर समाप्ति की ओर है, ऐसे में अब बाजार कंपनी-विशेष गतिविधियों पर केंद्रित रहेगा। आने वाले समय में बाजार की दिशा वैश्विक और घरेलू महंगाई के आंकड़ों, व्यापार से जुड़े घटनाक्रम, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के प्रवाह और एआई से जुड़ी चिंताओं पर निर्भर करेगी, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
यह महत्वपूर्ण है कि निवेशक वर्तमान वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्यों पर बारीकी से नजर रखें, क्योंकि ये कारक आगामी हफ्तों और महीनों में बाजार की चाल तय करेंगे। बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति में सावधानीपूर्वक निवेश करना ही बुद्धिमानी है।


