



Vijaya Ekadashi: भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण विजया एकादशी का पावन पर्व, भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित है। इस दिन उनकी विधि-विधान से पूजा और आरती करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है, जो घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का संचार करता है। आइए जानते हैं विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की आरती करने के महत्वपूर्ण नियम और इसका महत्व।
विजया एकादशी: भगवान विष्णु की आरती से पाएं पुण्य लाभ
विजया एकादशी पर आरती के नियम और महत्व
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, और फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली विजया एकादशी तो हर मनोकामना को पूर्ण करने वाली मानी जाती है। इस पवित्र दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना और उनकी मंगलमय आरती का विधान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आरती केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी आस्था और प्रेम को अभिव्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। सही पूजा विधि से की गई आरती भक्त को आंतरिक शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर करती है। विजया एकादशी के अवसर पर इस विशेष पूजा विधि का पालन करने से भक्तों को निश्चित रूप से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भगवान विष्णु की आरती करने के महत्वपूर्ण नियम
भगवान विष्णु की आरती करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, जो आपकी पूजा को पूर्णता प्रदान करते हैं। आइए जानते हैं इस पावन दिन भगवान विष्णु की आरती करने की सही पूजा विधि क्या है:
- आरती हमेशा पंचप्रदीप (पांच बत्तियों वाला दीपक) से करनी चाहिए, जिसमें शुद्ध घी या तेल का उपयोग करें।
- आरती करते समय एक थाली में फूल, अक्षत (साबुत चावल), कुमकुम, चंदन, धूप और दीप रखें।
- आरती शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का हृदय से ध्यान करें और मन को पूर्ण रूप से शुद्ध रखें।
- आरती करते समय घंटी, शंख और अन्य सात्विक वाद्य यंत्र बजाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- आरती को हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) धीरे-धीरे घुमाते हुए करें।
- आरती को पहले भगवान के चरणों में चार बार, नाभि में दो बार, मुखमंडल में एक बार और फिर पूरे शरीर पर सात बार घुमाना चाहिए।
- आरती के बाद भगवान को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें और आरती का पवित्र जल सभी उपस्थित भक्तों पर छिड़कें।
- आरती के समय मन में किसी भी प्रकार का दुर्भाव या क्रोध न रखें, पूर्ण एकाग्रता बनाए रखें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- आरती पूर्ण होने पर भगवान को भोग लगाएं और उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें।
विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की इन नियमों के साथ श्रद्धापूर्वक आरती करने से न केवल घर में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि समस्त कष्टों का निवारण भी होता है। यह आरती भक्तों को भय, रोग और दरिद्रता से मुक्ति दिलाकर जीवन में हर क्षेत्र में विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद प्रदान करती है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।दीन बन्धु दुःख हर्ता, तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
इस पावन विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक आरती करके आप भी उनके दिव्य आशीर्वाद के भागी बनें। यह दिन सभी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में विजय प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।



