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फ़रवरी, 13, 2026
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शेयर मार्केट में हाहाकार: AI और फेड की चिंता से आईटी स्टॉक्स धड़ाम, निवेशकों को भारी नुकसान

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Share Market: बीते गुरुवार को भारतीय आईटी स्टॉक्स में 5 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निफ्टी आईटी इंडेक्स को लगभग 10 महीनों के सबसे निचले स्तर के करीब धकेल दिया। यह गिरावट मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कंपनियों को होने वाले संभावित नुकसान की आशंकाओं और अमेरिका में उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कम होने से जुड़ी है।

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शेयर मार्केट में हाहाकार: AI और फेड की चिंता से आईटी स्टॉक्स धड़ाम, निवेशकों को भारी नुकसान

शेयर मार्केट में आईटी स्टॉक्स क्यों गिरे?

गुरुवार के कारोबारी सत्र में, 10-स्टॉक वाला निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बनकर उभरा, जिसके कारण आईटी कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 1.3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी दिग्गजों के शेयर लगभग 6 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इसी अवधि में, बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत और स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन निफ्टी आईटी इंडेक्स में सबसे ज्यादा 5.40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

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इस भारी-भरकम गिरावट का एक बड़ा कारण अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक और उसका नया टूल क्लाउड कोवर्क है। यह एआई टूल कोडिंग से लेकर मार्केटिंग, लीगल और अकाउंटिंग जैसे काम खुद से कर सकता है, जो पारंपरिक रूप से आईटी कंपनियां करती हैं। निवेशकों को चिंता है कि यह टूल आईटी कंपनियों की मदद करने के बजाय उनकी जगह ले सकता है, जिससे उनकी आय और नौकरियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इसके अतिरिक्त, अमेरिका में जनवरी के रोजगार आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे, जिसमें 130,000 नई नौकरियां जोड़ी गईं और बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों ने यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जो आमतौर पर ग्रोथ स्टॉक्स जैसे कि टेक कंपनियों के लिए एक बुरी खबर मानी जाती है।

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विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “एंथ्रोपिक शॉक से जूझ रहे टेक स्टॉक्स के जल्द ठीक होने की उम्मीद नहीं है।” कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अपने राजस्व का 40 प्रतिशत तक का नुकसान झेल सकती हैं, क्योंकि एआई वह काम करना शुरू कर देगा जो पहले इंसान करते थे। एलपीएल फाइनेंशियल के थॉमस शिप बताते हैं, “एआई के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने का डर है, मूल्य निर्धारण का दबाव अधिक है, और उनके प्रतिस्पर्धी लाभ कमजोर हो गए हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें एआई से बदलना आसान हो सकता है।” यह स्थिति भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

मोतीलाल ओसवाल ने चेतावनी दी है कि एआई पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग को कम महत्वपूर्ण बना देगा। हालांकि, वे अगले 3-6 महीनों में एआई पार्टनरशिप पर कड़ी नजर रखने का सुझाव देते हैं, जिससे 2026 के मध्य तक नई एआई सर्विस डील्स हो सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय आईटी कंपनियां इस डिजिटल क्रांति के सामने टिक पाएंगी और खुद को कैसे अनुकूलित करेंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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