back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 14, 2026
spot_img

भारत-अमेरिका रक्षा संबंध: हिंद महासागर में भारत की बढ़ती ताकत और आत्मनिर्भरता की नई गाथा

spot_img
- Advertisement - Advertisement

P-8I: समुद्री निगरानी का बेजोड़ हथियार और भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान रक्षा खरीद परिषद ने कई बड़े फैसले लेकर यह संदेश दिया है कि देश अपनी वायु और समुद्री क्षमता को तेजी से बढ़ाने जा रहा है। एक ओर लड़ाकू विमानों की नई खेप को मंजूरी मिली है, तो दूसरी ओर नौसेना के लिए लंबी दूरी तक नजर रखने और वार करने वाले P-8I समुद्री गश्ती विमानों की राह भी खुली है। ये P-8I विमान युद्ध के मैदान का नक्शा पलटने में माहिर माने जाते हैं। ये लंबी दूरी की समुद्री टोह, पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री प्रहार में विशेषज्ञता रखते हैं। इनकी पैनी नजर न केवल समुद्र की सतह के ऊपर, बल्कि उसके नीचे छिपे खतरों पर भी रहती है। दुश्मन पनडुब्बियों की हलचल पकड़ना, जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखना और संकट के समय त्वरित प्रहार करना, ये सब इसकी क्षमताओं का हिस्सा है। भारतीय नौसेना पहले से ही ऐसे 12 विमान सफलतापूर्वक संचालित कर रही है, जिन्होंने हजारों घंटे की उड़ान भरकर अपनी उपयोगिता और विश्वसनीयता सिद्ध की है। एक दशक से अधिक सेवा के बाद भी इनका प्रदर्शन बेजोड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

हिंद महासागर आज विश्व की बड़ी शक्तियों की खींचतान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस मार्ग से भारी मात्रा में व्यापार होता है, ऊर्जा आपूर्ति होती है और सामरिक जहाजों की आवाजाही निरंतर जारी रहती है। प्रतिदिन हजारों व्यापारी पोत और अनेक युद्धपोत इस क्षेत्र से गुजरते हैं। ऐसे में समुद्री क्षेत्र की पूरी जानकारी, यानी कहां कौन चल रहा है, किसकी क्या मंशा है, यह जानना ही असली समुद्री ताकत है। P-8I और आने वाले मानवरहित निगरानी विमान मिलकर भारत की समुद्री समझ को नई ऊंचाई देने वाले हैं। इससे किसी भी संदिग्ध हलचल पर समय रहते प्रभावी प्रतिक्रिया संभव होगी।

- Advertisement -

बदलते रक्षा संबंध: खरीददार से रणनीतिक साझेदार तक का सफर

भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध अब निश्चित रूप से गहरे हो रहे हैं। कभी यह रिश्ता केवल खरीदार और विक्रेता तक सीमित था, लेकिन अब यह साझा तैयारी, संयुक्त अभ्यास और तकनीकी सहयोग तक पहुंच गया है। सुरक्षित संचार, सूचनाओं का आदान-प्रदान और समुद्री क्षेत्र में तालमेल के लिए दोनों देशों ने कई आधारभूत समझौते किए हैं। अब जोर केवल खरीद पर नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीकी साझेदारी पर भी है, ताकि दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता बढ़ सके।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Bihar Weather: अगले 48 घंटे में बिहार का मौसम लेगा करवट, 40 KM/H की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

एक दिलचस्प मोड़ तब आया था जब पिछले साल अमेरिका ने भारत पर ऊंचे शुल्क लगा दिए थे। उस समय भारत ने P-8I की खरीद पर चर्चा रोक दी थी। इस कदम ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों को साफ संकेत दिया कि भारत अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। बताया जाता है कि उस दौरान अमेरिकी रक्षा कंपनियों की बेचैनी काफी बढ़ गई थी। अब जब व्यापारिक खटास काफी हद तक कम हुई है और भारत से फिर खरीद की मंजूरी मिली है, तो अमेरिकी पक्ष में उत्साह का माहौल है। वहां यह भी खुल कर कहा जा रहा है कि भारत को मजबूत बनाना उनके लिए भी फायदेमंद है और इससे उनके यहां रोजगार भी बढ़ते हैं। साफ है कि रक्षा सौदे अब सामरिक और आर्थिक दोनों तराजू पर तोले जा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

रणनीतिक सहयोग की बढ़ती रफ्तार

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ संकेत दिया है कि वाशिंगटन भारत को होने वाली रक्षा बिक्री और बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की रफ्तार लगातार तेज रहने का संदेश मिलता है। दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक सचिव एस पॉल कपूर ने संसदीय सुनवाई के दौरान कहा कि कई हथियार प्रणालियों की अतिरिक्त खरीद की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं, जो भारत की अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता को मजबूत करेंगी और साथ ही अमेरिका के रक्षा क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ाएंगी। उनका कहना था कि व्यापार को लेकर पहले जो अनिश्चितताएं थीं, उनके बावजूद रक्षा सहयोग की गति बनी रही और अब व्यापार विवाद काफी हद तक सुलझ जाने से यह और तेज होगी।

इसी बढ़ते तालमेल की झलक संयुक्त सैन्य अभ्यास वज्र प्रहार में भी दिखेगी, जो हिमाचल प्रदेश के बकलोह में होने जा रहा है। दोनों देशों की विशेष बल इकाइयां आतंकवाद रोधी अभियान, पहाड़ी युद्ध, हवाई उतराई, जल मार्ग से घुसपैठ और बचाव अभियान जैसे कठिन अभ्यास साथ करेंगी। बकलोह जैसा कठिन पहाड़ी इलाका इस तरह की तैयारी के लिए उपयुक्त माना जाता है, जहां अभ्यास लगभग वास्तविक हालात जैसा होता है।

बदलते वैश्विक परिदृश्य में संदेश एकदम स्पष्ट है। भारत अपनी समुद्री सीमा, आकाश और भूभाग की रक्षा के लिए अब आधे उपायों पर भरोसा नहीं करेगा। P-8I जैसे विमान केवल मशीन नहीं, बल्कि आंख, कान और जरूरत पड़ने पर मुक्का भी हैं। भारत-अमेरिका रक्षा संबंध केवल दोस्ती की कहानी नहीं, बल्कि हितों के मेल की कहानी है। जहां हित मिलते हैं, वहीं साझेदारी टिकती है। भारत अब यही कर रहा है, अपने हितों के आधार पर रिश्ते गढ़ रहा है, अपनी समुद्री ताकत बढ़ा रहा है और यह जता रहा है कि हिंद महासागर हो या हिमालय की चोटियां, भारत तैयार है, सतर्क है और जरूरत पड़ी तो सख्त जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

T20 World Cup 2026: क्या भारतीय क्रिकेट के लिए बन रहा है ऐतिहासिक संयोग?

T20 World Cup 2026: भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों में एक बार फिर उम्मीदों...

Rohit Shetty फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: पुणे से मुंबई तक ऐसे बिछाया गया था जाल!

Rohit Shetty News: बॉलीवुड के सिंघम डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग...

Free Fire MAX: 14 फरवरी को पाएं फ्री बंडल्स और स्किन्स!

Free Fire MAX: लोकप्रिय बैटल रॉयल गेम फ्री फायर मैक्स के शौकीनों के लिए...

Ramayana Movie: रणबीर कपूर की ‘रामायण’ होगी साल 2026 की सबसे बड़ी फिल्म, निर्माता ने खोला विजन का राज

Ramayana Movie: बड़े पर्दे पर भगवान राम की कहानी को दोबारा जीवंत करने का...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें