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फ़रवरी, 13, 2026
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O Romeo Review: शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की ‘ओ रोमियो’ एक डार्क लव स्टोरी, विशाल भारद्वाज का फिर चला जादू!

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O Romeo: विशाल भारद्वाज की दुनिया में कदम रखते ही आपको एहसास हो जाएगा कि आप किसी आम प्रेम कहानी के साक्षी नहीं बनने वाले। जब स्क्रीन पर “कौन?” सवाल गूँजता है और शाहिद की आवाज़ आती है “हीरो!”, तो वहीं से फ़िल्म का मिजाज़ तय हो जाता है कि यह फ़िल्म प्रेम, अपराध और जुनून का एक अनूठा संगम है। हुसैन ज़ैदी की किताब ‘क्वींस ऑफ़ मुंबई’ के किरदारों हुसैन उस्तरा और सपना दीदी से प्रेरित यह कहानी आपको मुंबई की अंडरवर्ल्ड गलियों में ले जाएगी, जहाँ प्यार और गोलीबारी का जबरदस्त तालमेल देखने को मिलेगा।

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O Romeo Review: शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की ‘ओ रोमियो’ एक डार्क लव स्टोरी, विशाल भारद्वाज का फिर चला जादू!

O Romeo: एक गैंगस्टर की अनोखी प्रेम कहानी

बात है 1995 की मुंबई की, जब अंडरवर्ल्ड का दबदबा था। कहानी की शुरुआत में गैंगस्टर उस्तरा (शाहिद कपूर) इंटेलिजेंस ब्यूरो के लिए काम करता है, जहाँ ब्यूरो का हेड ख़ान उसे दूसरे गैंगस्टर्स का सफ़ाया करने का जिम्मा सौंपता है। इसी दौरान उसकी मुलाक़ात अफ़सा क़ुरैशी (तृप्ति डिमरी) से होती है, जो चार लोगों को मारने की सुपारी लेकर आती है। अब वो सुपारी किसकी है, और क्या उस्तरा वो सुपारी लेता है, ये जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा। विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर का जादू एक बार फिर परदे पर गजब ढा रहा है।

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विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर जब भी साथ आए हैं, उन्होंने कमाल ही किया है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला है। आपने कई प्रेम कहानियाँ देखी होंगी, लेकिन एक गैंगस्टर की प्रेम कहानी में उसका सरहद पार कर जाना, मौत को छूकर वापस लौट आना, ये सब कुछ नया और रोमांचक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फ़िल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई भी किरदार पूरी तरह से सही नहीं है, हर कैरेक्टर ग्रे शेड में है, लेकिन फिर भी उनसे नफ़रत नहीं होती। फ़िल्म का कैमरा वर्क, प्रोडक्शन वैल्यू और बैकग्राउंड स्कोर सब कुछ बड़े पैमाने पर है, जो इसे लार्जर दैन लाइफ़ बनाता है।

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फ़िल्म का क्लाइमेक्स दमदार है, जब दोनों प्रेमी मिलकर बंदूकें चलाते हैं। अब तक हमने हीरो को पंजाबी गानों पर एक्शन करते देखा है, लेकिन जब फ़िल्म की शुरुआत में शाहिद का कैरेक्टर उस्तरा ‘धक धक करने लगा’ गाने पर अपने उस्तरे से 50-100 लोगों को ढेर करता है, तो उसका असर जबरदस्त होता है। 90 के दशक के गाने ‘ए मेरे हमसफ़र’ और ‘दिल है कि मानता नहीं’ को बैकग्राउंड में बड़ी ही चतुराई से इस्तेमाल किया गया है, जो आपको उस दौर में ले जाते हैं।

जबरदस्त Star Cast और दमदार एक्टिंग का जलवा

शाहिद कपूर एक प्रतिभाशाली अभिनेता हैं, लेकिन उनके भीतर के ड्रामा को विशाल भारद्वाज से बेहतर कोई नहीं निकाल सकता। ‘हैदर’ और ‘कमीने’ जैसी फ़िल्मों के बाद, इस फ़िल्म में भी शाहिद अपनी एक्टिंग के कई शेड्स दिखाते हैं। वह रोमियो भी लगते हैं, गैंगस्टर भी और एक कमाल के अभिनेता भी। वहीं तृप्ति डिमरी इस फ़िल्म की यूएसपी हैं। उन्होंने अब तक का सबसे अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विशाल भारद्वाज ने उन्हें किसी हीरो की तरह ही बड़े पर्दे पर पेश किया है।

  • शाहिद कपूर (उस्तरा)
  • तृप्ति डिमरी (अफ़सा क़ुरैशी)
  • नाना पाटेकर
  • फरीदा जलाल
  • अरुणा ईरानी
  • तमन्ना भाटिया
  • अविनाश तिवारी
  • दिशा पाटनी (जूली)
  • राहुल देशपांडे (इंस्पेक्टर पठारे)
  • हुसैन दलाल (छोटू)
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नाना पाटेकर, फरीदा जलाल और अरुणा ईरानी छोटी ही भूमिका में सही, लेकिन अपना गहरा असर पर्दे पर छोड़ जाते हैं। तमन्ना भाटिया के तीन-चार सीन ही हैं, लेकिन उनमें भी उन्हें परफॉर्म करने का अच्छा मौका मिला है। अविनाश तिवारी ने ट्रेलर लॉन्च पर कहा था कि इस बार मुझे पहचान लेना, और उन्होंने सच में ऐसा काम किया है जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी एक्टिंग चौंकाने वाली है। जूली के रोल में दिशा पाटनी भी याद रह जाती हैं। फ़िल्म में इंस्पेक्टर पठारे के रोल में राहुल देशपांडे एक सरप्राइज पैकेज हैं। छोटू के रोल में हुसैन दलाल का काम भी बेहतरीन है।

विशाल भारद्वाज का निर्देशन और संगीत

हुसैन जैदी की इस कहानी को विशाल भारद्वाज और रोहन नरूला ने बड़े ही स्टाइलिश अंदाज़ में स्क्रीनप्ले में ढाला है। उनकी लेखन में गहराई है और जो कागज़ पर नहीं लिखा जा सका, उसे विशाल ने अपने निर्देशन और अभिनेताओं से करवा लिया है। शराब रखने के लिए कांच से बनी बंदूक से लेकर छत पर रखा हुआ बाथटब, स्पेन में जलाल की म्यूज़िकल लेकिन डरावनी दुनिया, हर चीज़ को विशाल भारद्वाज ने करीने से गढ़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विशाल भारद्वाज की फ़िल्म है, तो संगीत भी लाजवाब है। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

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कुल मिलाकर, वैलेंटाइन डे के मौके पर अगर आप एक इंटेंस लव स्टोरी और शानदार परफॉरमेंस देखना चाहते हैं, तो यह फ़िल्म आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह आपको 90 के दशक की मुंबई के साथ एक अनोखी प्रेम कहानी का अनुभव कराएगी।

  • फ़िल्म रेटिंग: 4 स्टार्स
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