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फ़रवरी, 13, 2026
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महाशिवरात्रि 2026: इस पावन पर्व पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का अद्भुत संयोग

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Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महापर्व महाशिवरात्रि, भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह का पावन उत्सव है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिव लिंग पर जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी वस्तुएं अर्पित कर महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष 2026 की महाशिवरात्रि पर, एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो कई राशियों के जातकों के लिए विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होगा।

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महाशिवरात्रि 2026: इस पावन पर्व पर लक्ष्मी नारायण राजयोग का अद्भुत संयोग

महाशिवरात्रि 2026 और लक्ष्मी नारायण राजयोग का महत्व

Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, शिव भक्तों के लिए साल का सबसे बड़ा और पवित्र दिन होता है। इस वर्ष 2026 में, महाशिवरात्रि का महापर्व एक अत्यंत विशेष ज्योतिषीय संयोग के साथ आ रहा है, जिसे लक्ष्मी नारायण राजयोग के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब बुध और शुक्र ग्रह एक ही राशि में युति करते हैं, तब लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होता है। यह योग धन, समृद्धि, प्रेम और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। इस शुभ योग के निर्माण से विभिन्न राशियों के जातकों पर इसका गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह राजयोग विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा जिनकी कुंडली में बुध और शुक्र की स्थिति मजबूत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह संयोग न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि व्यापार और करियर के क्षेत्र में भी उन्नति के अवसर लेकर आएगा।

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ग्रहों की चाल के अनुसार, इस महाशिवरात्रि पर बन रहा लक्ष्मी नारायण राजयोग कुछ राशियों के लिए अप्रत्याशित लाभ और सौभाग्य लेकर आएगा। जिन राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ सकता है उनमें वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला राशि के जातक शामिल हैं। इन राशियों के जातकों को धन लाभ, वैवाहिक सुख, करियर में तरक्की और बौद्धिक क्षमताओं में वृद्धि का अनुभव हो सकता है। यह समय नई परियोजनाओं को शुरू करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी उत्तम है।

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पूजा विधि

  • प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
  • एक चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें या किसी शिवालय में जाकर दर्शन करें।
  • शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, इत्र से अभिषेक करें।
  • इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल, कनेर के फूल, सफेद चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें।
  • महादेव को मिठाई, फल और पंचामृत का भोग लगाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  • महादेव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का यथाशक्ति जप करें।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
  • व्रत के पारण के लिए रात्रि जागरण के बाद अगले दिन सुबह पारण करें।
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मंत्र

ॐ नमः शिवाय।

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

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निष्कर्ष एवं उपाय

महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व, विशेषकर लक्ष्मी नारायण राजयोग के निर्माण के कारण, आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने वाला है। इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने और विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस शुभ दिन पर गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। महादेव की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और आप एक सुखी और समृद्ध जीवन व्यतीत करेंगे। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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