



Loan Recovery: अक्सर देखा गया है कि कर्ज वसूली के नाम पर बैंक या उनके एजेंट ग्राहकों को धमकाने और परेशान करने से बाज नहीं आते, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी प्रक्रिया के दौरान कर्जदारों के साथ सही व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं, जो बैंकों और रिकवरी एजेंट्स को सख्त और दबाव वाले तरीकों का इस्तेमाल करने से रोकेंगे। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाएगा और उपभोक्ताओं को मानसिक उत्पीड़न से बचाएगा।
लोन रिकवरी: अब ग्राहकों को डरा-धमका नहीं पाएंगे रिकवरी एजेंट, RBI ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश
RBI द्वारा जारी ये नए दिशानिर्देश क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर सभी वाणिज्यिक बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) पर लागू होंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य रिकवरी एजेंटों द्वारा अपनाई जाने वाली अनुचित प्रथाओं पर लगाम लगाना है, जिससे कर्जदारों को गरिमापूर्ण तरीके से निपटने का अधिकार मिल सके।
सख्त हुए लोन रिकवरी नियम: एजेंट्स के हर कॉल होंगे रिकॉर्ड
नए नियमों के तहत, रिकवरी प्रक्रिया के दौरान गाली-गलौज करने या धमकी देने, बार-बार कॉल कर परेशान करने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, या भुगतान न करने के गंभीर परिणामों के बारे में चेतावनी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। ये सभी नियम इस साल 1 जुलाई से लागू होंगे, जबकि इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर 4 मार्च तक फीडबैक दिया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करेगा कि बैंकों को अपनी रिकवरी नीतियों को उपभोक्ता-अनुकूल बनाना होगा।
ड्राफ्ट गाइडलाइंस में यह भी साफ किया गया है कि बैंकों को रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के निपटान के लिए एक विशेष और प्रभावी सिस्टम बनाना होगा। इसके अतिरिक्त, बैंक को इस बात का पूरा ब्योरा रखना होगा कि रिकवरी एजेंट किस तरीके से और कितनी बार ग्राहकों को लोन रिकवरी के लिए कॉल कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि रिकवरी एजेंटों द्वारा की जाने वाली हर कॉल रिकॉर्ड की जाएगी और उन्हें हर बार ग्राहकों से शालीनता और सम्मान के साथ बात करनी होगी।
नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य और प्रभाव
इन भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों में RBI ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि रिकवरी एजेंट को अब केवल लोन लेने वाले व्यक्ति से ही संपर्क करने की अनुमति होगी। वे कर्जदार के रिश्तेदारों या किसी अन्य तीसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, रिकवरी एजेंट ग्राहकों को केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल कर सकते हैं या उनसे मिल सकते हैं। इस निर्धारित समय से पहले या बाद में उन्हें किसी भी प्रकार के संपर्क की अनुमति नहीं होगी।
ड्रॉफ्ट में रिकवरी एजेंटों को यह भी सलाह दी गई है कि वे किसी के दुख, परिवार की इमरजेंसी, शादी या त्योहार जैसे संवेदनशील मौकों पर लोन रिकवरी की कोशिशों से बचें। यह मानवीय दृष्टिकोण सुनिश्चित करेगा कि कर्जदारों को ऐसे समय में अतिरिक्त दबाव का सामना न करना पड़े। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन नियमों में रिकवरी एजेंटों के लिए विशेष प्रशिक्षण लेने और ‘डेट रिकवरी एजेंट’ प्रोग्राम पूरा करने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस से प्रमाणन प्राप्त करने की बात भी कही गई है। इससे रिकवरी प्रक्रिया में अधिक व्यावसायिकता और नैतिकता आएगी। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा कवच
ये दिशानिर्देश उन लाखों कर्जदारों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेंगे जो अक्सर बैंकों और उनके रिकवरी एजेंटों के आक्रामक रवैये से परेशान रहते थे। अब ग्राहकों को अपनी गरिमा और निजता का अधिकार सुनिश्चित होगा, और उन्हें पता होगा कि किस प्रकार की वसूली प्रक्रिया स्वीकार्य है और कौन सी नहीं। बैंकों को भी यह समझना होगा कि वे केवल वित्तीय संस्थानों के रूप में काम नहीं करते, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करते हैं। इससे वित्तीय प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ेगी, जो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह एक स्वागत योग्य कदम है जो भारत के वित्तीय क्षेत्र में उपभोक्ता संरक्षण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।





