



तमिलनाडु समाचार: राजनीति की बिसात पर, जब मोहरे अपनी चाल चलते हैं, तो अक्सर सत्ता और विपक्ष के बीच नियमों की उलझन सामने आती है। ऐसी ही एक उलझन में अब टीवीके प्रमुख विजय ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को घेरा है, जहां चुनावी सभाओं की अनुमति को लेकर सवाल उठे हैं।
तमिलनाडु समाचार: विजय ने सीएम स्टालिन पर साधा निशाना, बोले- चुनावी सभा की अनुमति में ‘स्टालिन ऑपरेटिंग प्रोसीजर’!
तमिलनाडु समाचार: क्या है अनुमति विवाद?
अपनी एक चुनावी सभा में केवल 4,998 व्यक्तियों को ही शामिल होने की अनुमति मिलने पर, तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लागू मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) दरअसल स्टालिन की निजी कार्यप्रणाली बन गई हैं। सलेम के सीलानाइकेनपत्ती में एक राजनीतिक जनसभा को संबोधित करते हुए, विजय ने एमके स्टालिन सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार अन्य दलों को तो जनसभाएं आयोजित करने की अनुमति सहजता से दे रही है, लेकिन टीवीके को जानबूझकर रोका जा रहा है। विजय ने स्पष्ट किया कि वे सलेम केवल वोट मांगने नहीं, बल्कि न्याय की गुहार लगाने आए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विजय ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जहां अन्य राजनीतिक दलों को अनुरोध करने पर तुरंत सभाओं की अनुमति मिल जाती है, वहीं तमिलगा वेट्री कज़गम को अनुमति देने से इनकार कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया, “वे अन्य पार्टियों को सम्मेलन, सार्वजनिक सभाएं या हॉल में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति देते हैं और उन्हें स्थान भी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन हमें न तो जगह दी जाती है और न ही अनुमति। अन्य दलों के लिए, उपयुक्त स्थान और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती है ताकि वे लोगों से मिल सकें, लेकिन मुझे ये सुविधाएँ नहीं मिलतीं, न ही अनुमति। यह कैसा न्याय है?” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
‘स्टालिन ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ पर विजय का कटाक्ष
विजय ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अधिकारी एसओपी यानी ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ की बात करते हैं। लेकिन उनके लिए, इसका मतलब ‘स्टालिन – ओह सॉरी, स्टालिन सर ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ है। इस घटनाक्रम के तहत, कार्यक्रम स्थल पर सावधानी बरतते हुए पार्टी सदस्यों और पदाधिकारियों के पहचान पत्रों का कड़ाई से सत्यापन किया गया। पुलिस के सख्त दिशानिर्देशों के तहत, विजय के नेतृत्व वाली टीवीके की इस राजनीतिक जनसभा में केवल 4,998 लोगों को ही प्रवेश की अनुमति थी। केवल क्यूआर कोड वाले प्रवेश पास धारकों को ही अंदर जाने दिया गया, जिसमें कोई अपवाद नहीं था।
सुरक्षा व्यवस्था और स्टालिन की घोषणा
सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और अत्यधिक भीड़ से बचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की सघन जांच की गई और यातायात को भी कई जगहों से डायवर्ट किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन सख्त उपायों का उद्देश्य इस महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना था, खासकर पिछले साल सितंबर में टीवीके की एक सभा के दौरान हुई भगदड़ की दुखद घटना के मद्देनजर, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी। यह एक गंभीर विषय है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वहीं, इसी दिन मुख्यमंत्री स्टालिन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि ‘कलाइग्नार महिला अधिकार योजना’ के तहत फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के लिए ₹3,000 की राशि अग्रिम रूप से जमा कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, ग्रीष्मकालीन विशेष पैकेज के तौर पर ₹2,000 भी दिए गए हैं, जिससे इस महीने 1.31 करोड़ लाभार्थियों के लिए कुल ₹5,000 की राशि उनके खातों में पहुँच गई है। यह कदम राज्य की महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है, ऐसा सत्ता पक्ष का दावा है।






