



Vijaya Ekadashi 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विजया एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। यह पवित्र तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन विधि-विधान से व्रत व पूजा करने से साधक को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है, समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विजया एकादशी 2026: विजय प्रदान करने वाले इस पावन व्रत का जानें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि
विजया एकादशी 2026 का महात्म्य और पूजन विधि
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। नाम के अनुरूप ही, यह एकादशी अपने भक्तों को जीवन के हर क्षेत्र में विजय दिलाने वाली मानी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व समुद्र किनारे विजया एकादशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई थी। इसी कारण, शत्रु बाधा, मुकदमे या किसी भी प्रकार की चुनौती में सफलता पाने के लिए यह एकादशी व्रत अत्यंत फलदायी है। इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से न सिर्फ भौतिक सुख प्राप्त होते हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विजया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय/तिथि |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 11 मार्च 2026, बुधवार रात 09:12 बजे से |
| एकादशी तिथि समाप्त | 12 मार्च 2026, गुरुवार शाम 07:11 बजे तक |
| पारण (व्रत तोड़ने का) समय | 13 मार्च 2026, शुक्रवार सुबह 06:36 बजे से 08:58 बजे तक |
| द्वादशी तिथि समाप्त | 13 मार्च 2026, शुक्रवार शाम 04:36 बजे तक |
विजया एकादशी पूजा विधि
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- एक कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते रखकर नारियल रखें, यह कलश स्थापना का प्रतीक है।
- भगवान विष्णु को धूप, दीप, चंदन, रोली, अक्षत, पीले पुष्प, तुलसी दल और ऋतु फल अर्पित करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- विजया एकादशी की व्रत कथा का श्रवण करें अथवा स्वयं पाठ करें।
- संध्या काल में भगवान विष्णु की आरती करें।
- रात में जागरण कर भगवान का भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
विजया एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से विजया एकादशी के महात्म्य के बारे में पूछा था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया था कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है। सतयुग में राजा हरिश्चंद्र को भी इस व्रत के प्रभाव से अपने राज्य की प्राप्ति हुई थी। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व मुनि वकदालभ्य के परामर्श पर विजया एकादशी का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिली थी। यह व्रत सभी प्रकार के कष्टों और बाधाओं को दूर कर जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
भगवान विष्णु का मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
उपाय और लाभ
विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें। इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है, दरिद्रता का नाश करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। आप अपनी क्षमता अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अवश्य करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें





