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फ़रवरी, 13, 2026
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Darbhanga News: संस्कृत विश्वविद्यालय में लौटा ‘मिनी इंडिया’, 7 दिन के कैंप से लौटकर छात्रों ने सुनाए एकता के अविस्मरणीय किस्से

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Darbhanga News: जैसे तपकर सोना कुंदन बनता है और मिट्टी तपकर ईंट, ठीक वैसे ही राष्ट्रीय एकता शिविर से लौटे स्वयंसेवकों के चेहरे पर आत्मविश्वास और अनुभव की एक नई चमक थी। दरभंगा के कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय में जब इन स्वयंसेवकों ने अपने अनुभव साझा किए, तो पूरा माहौल प्रेरणा से भर गया।

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Darbhanga News: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (केएसडीएसयू) के स्नातकोत्तर परिसर में बुधवार को एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह उन स्वयंसेवकों के सम्मान में था, जो भागलपुर में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय एकीकरण शिविर (एनआईसी कैंप) से लौटे थे। विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना स्नातकोत्तर इकाई और रामेश्वर लता संस्कृत महाविद्यालय ने संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें लौटे हुए छात्रों ने अपने प्रेरणादायक अनुभव साझा किए।

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Darbhanga News: जब एकता के अनुभव लेकर लौटे स्वयंसेवक

यह सप्त दिवसीय एनआईसी कैंप 4 फरवरी से 10 फरवरी तक मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर में आयोजित किया गया था। इसमें विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों ने पूरी सक्रियता से भाग लिया और दरभंगा का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम का समन्वय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर कुमार ने किया। वहीं, स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा एवं सह-संयोजक डॉ. मुकेश निराला ने मंच का सफल संचालन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, डॉ. कुणाल कुमार झा और डॉ. धीरज कुमार पांडेय समेत कई वरिष्ठ शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

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“ये 7 दिन जीवन के सबसे हसीन पल थे”: काजल कुमारी

शिविर से लौटीं स्वयंसेविका काजल कुमारी ने जब अपने अनुभव साझा करना शुरू किया, तो उनकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। उन्होंने कहा, “यह मेरा दूसरा एनआईसी कैंप था और यह मेरे जीवन के सबसे यादगार और हसीन पलों में से एक बन गया है।” काजल ने बताया कि कैसे देश के अलग-अलग राज्यों से आए स्वयंसेवकों से मिलना, उनकी संस्कृति, भाषा और रहन-सहन को जानना एक अविस्मरणीय अनुभव था। उन्होंने भावुक होकर कहा कि शिविर में जाति-धर्म का कोई बंधन नहीं था, हम सब सिर्फ एक भारतीय थे। प्रतिदिन सुबह पीटी से लेकर अनुशासित दिनचर्या ने आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई ऊंचाइयां दी हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

‘एकता शिविर’ नाम को किया सार्थक: विश्वमोहन झा

वहीं, स्वयंसेवक विश्वमोहन झा ने शिविर को उसके नाम ‘एकता शिविर’ पर पूरी तरह खरा बताया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ नाम का एकता शिविर नहीं था, बल्कि यहां सचमुच भाषा, जाति और धर्म की सीमाओं से परे सबने एक-दूसरे की संस्कृति को अपनाया।” विश्वमोहन ने बताया कि शिविर के दौरान उन्हें एनटीपीसी को करीब से देखने का मौका मिला। इसके अलावा, मंदार पर्वत और विक्रमशिला महाविहार जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर महत्वपूर्ण जानकारी भी प्राप्त हुई। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से साइबर सिक्योरिटी, स्किल इंडिया और एड्स नियंत्रण जैसे गंभीर विषयों पर प्रशिक्षण मिला, जिससे समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प और मजबूत हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह के शिविर राष्ट्रीय सेवा योजना की मूल भावना को दर्शाते हैं।

भविष्य के लिए भी मिला मार्गदर्शन

अनुभव साझा करने के सत्र के बाद, स्वयंसेवकों को “माय भारत बजट क्वेस्ट 2026” के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि वे देश की आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ सकें। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों ने एक स्वर में इन युवा स्वयंसेवकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि वे शिविर से मिली सीख को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उपयोग करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में एक नई ऊर्जा का संचार कर गया।

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