



भागलपुर: सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) इक्विटी नियमावली पर रोक लगाए जाने के खिलाफ भागलपुर में विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग है कि जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न मुक्त विश्वविद्यालय के लिए यह नियमावली लागू की जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
UGC Equity Rules Stay: छात्र संगठनों ने किया विरोध
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में बहुजन छात्र संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई। बहुउद्देशीय प्रशाल भवन के प्रांगण में छात्रों की भारी भीड़ जुटी। अम्बेडकर विचार विभाग और समाज कार्य विभाग के सामने छात्रों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। आल इंडिया स्टुडेंट एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में छात्रों ने बहुउद्देशीय प्रशाल भवन से तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन तक एक प्रतिरोध मार्च भी निकाला।
जातिगत भेदभाव मुक्त विश्वविद्यालय की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त एक समावेशी विश्वविद्यालय के वातावरण के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली का लागू होना अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका मानना है कि यह नियमावली शैक्षणिक संस्थानों में समानता को बढ़ावा देगी।
इसके अतिरिक्त, छात्रों ने नई शिक्षा नीति 2020 को भी वापस लेने की मांग की, जिसे वे बहुजन विरोधी बताते हैं। उनका जोर था कि शिक्षा सभी के लिए समान अवसरों वाली, समता मूलक समाज की रचना में सहायक होनी चाहिए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारेबाजी की, जो शिक्षा नीति और यूजीसी नियमावली पर सरकार के रुख के प्रति उनकी निराशा को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आगे की कार्रवाई और जनSDemand
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने यूजीसी इक्विटी नियमावली को तत्काल लागू करने और नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग दोहराई। यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा क्षेत्र में समानता और न्याय के लिए चल रहे व्यापक संघर्ष का एक हिस्सा है।
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यह घटना दर्शाती है कि छात्र समुदाय शैक्षणिक नीतियों के प्रति कितना जागरूक और मुखर है, खासकर जब उन्हें लगता है कि नीतियां समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जा रही हैं।
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