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फ़रवरी, 13, 2026
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Google Passkeys: गूगल अकाउंट सुरक्षा का नया अध्याय, जानें कैसे करेगा काम

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Google Passkeys: डिजिटल युग में ऑनलाइन सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, जहां हैकर्स लगातार नए तरीकों से यूजर्स के डेटा पर सेंध लगाने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसे में गूगल अपने यूजर्स के अकाउंट्स को और भी सुरक्षित बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठा रहा है, जिसे Google Passkeys के नाम से जाना जाता है। यह फीचर पारंपरिक पासवर्ड से कहीं अधिक मजबूत और सुविधाजनक है, जो आपके डिजिटल जीवन को एक नई सुरक्षा प्रदान करता है।

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Google Passkeys: गूगल अकाउंट सुरक्षा का नया अध्याय, जानें कैसे करेगा काम

इंटरनेट पर हर दिन बढ़ते खतरों के बीच, गूगल ने अपने यूजर्स की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब गूगल अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए कंपनी आपको पासकी (Passkey) का फीचर दे रही है। यह केवल एक नया फीचर नहीं, बल्कि पासवर्ड-मुक्त भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है, जो आपके ऑनलाइन अनुभव को सुरक्षित और सहज बनाएगा।

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Google Passkeys आखिर क्या हैं और क्यों हैं जरूरी?

पासकी मूल रूप से डिजिटल क्रेडेंशियल्स होते हैं जो आपके डिवाइस में ही सुरक्षित रूप से सेव रहते हैं। ये पारंपरिक पासवर्ड के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित होते हैं क्योंकि इन्हें फिशिंग हमलों या डेटा उल्लंघनों के माध्यम से चुराया नहीं जा सकता। जब आप किसी Google अकाउंट में साइन इन करते हैं, तो पासकी आपके डिवाइस के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जैसे फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक का उपयोग करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे साइन इन प्रक्रिया न केवल तेज होती है, बल्कि हैकिंग का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

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पासकी का प्राथमिक उद्देश्य पासवर्ड की कमजोरियों को दूर करना है। पासवर्ड अक्सर कमजोर होते हैं, उन्हें आसानी से भूल जाया जा सकता है, या फिर वे फिशिंग स्केम का शिकार बन सकते हैं। पासकी इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे आपके गूगल अकाउंट की सुरक्षा परत और भी मजबूत हो जाती है। यह आपके डिजिटल क्रेडेंशियल्स को सीधे आपके डिवाइस से जोड़ता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि केवल आप ही अपने अकाउंट तक पहुंच सकें।

पारंपरिक पासवर्ड से कहीं अधिक सुरक्षित

  • फिशिंग-प्रतिरोधी: पासकी फिशिंग हमलों के प्रति बेहद प्रतिरोधी होते हैं। चूंकि आप अपने डिवाइस पर सीधे प्रमाणीकरण कर रहे होते हैं और कोई पासवर्ड दर्ज नहीं कर रहे होते, इसलिए हैकर्स के पास चुराने के लिए कुछ होता ही नहीं।
  • अद्वितीय और मजबूत: प्रत्येक पासकी आपके डिवाइस के लिए अद्वितीय होती है और क्रिप्टोग्राफिक रूप से उत्पन्न होती है, जिससे अनुमान लगाना या क्रैक करना असंभव हो जाता है।
  • बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: यह फीचर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का उपयोग करता है, जैसे कि फिंगरप्रिंट या फेस आईडी, जो पासवर्ड के मुकाबले अधिक सुरक्षित और व्यक्तिगत होते हैं।
  • डिवाइस-बाउंड सुरक्षा: पासकी आपके डिवाइस में ही सुरक्षित रूप से सेव रहते हैं, जिससे वे एक केंद्रीय सर्वर पर संग्रहीत होने वाले पासवर्ड की तुलना में कम कमजोर होते हैं।
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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह तकनीक आपके डिवाइस को ही आपकी पहचान का हिस्सा बना देती है, जिससे किसी और के लिए आपके अकाउंट में सेंध लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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पासकी कैसे काम करते हैं?

पासकी वेबऑथएन (WebAuthn) स्टैंडर्ड पर आधारित हैं, जो एक सुरक्षित, सार्वजनिक कुंजी क्रिप्टोग्राफी प्रणाली है। जब आप पासकी के साथ किसी सर्विस में साइन इन करते हैं, तो आपका डिवाइस एक अद्वितीय क्रिप्टोग्राफिक कुंजी युग्म (की-पेयर) उत्पन्न करता है। सार्वजनिक कुंजी सर्विस के साथ साझा की जाती है, जबकि निजी कुंजी आपके डिवाइस पर सुरक्षित रूप से रहती है।

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साइन इन करते समय, सर्विस आपके डिवाइस को एक चुनौती भेजती है, जिसे निजी कुंजी का उपयोग करके हल किया जाता है। आपका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (जैसे फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान) इस प्रक्रिया को अधिकृत करता है। यदि सत्यापन सफल होता है, तो आप लॉग इन हो जाते हैं। यह प्रक्रिया अत्यंत तेज और सुरक्षित होती है।

गूगल अकाउंट में पासकी सेट अप कैसे करें?

अपने Google अकाउंट में पासकी सेट अप करना बहुत आसान है। आपको बस अपने गूगल अकाउंट की सुरक्षा सेटिंग्स में जाना होगा और पासकी विकल्प को इनेबल करना होगा। इसके बाद, आपका डिवाइस आपको बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण सेट करने के लिए मार्गदर्शन करेगा। एक बार सेट हो जाने के बाद, आपको हर बार पासवर्ड डालने की बजाय सिर्फ अपने फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का उपयोग करके लॉग इन करना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

पासकी फीचर न केवल सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि लॉग इन प्रक्रिया को भी सरल बनाता है। यह आधुनिक डिजिटल सुरक्षा का भविष्य है, और गूगल इसे अपने करोड़ों यूजर्स तक पहुंचाकर एक सुरक्षित ऑनलाइन इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।

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