



Sanskrit Competition: ज्ञान की गंगा में जब कोई डुबकी लगाता है, तो उसकी कीर्ति पताका चारों दिशाओं में फहर जाती है। कुछ ऐसा ही कमाल दरभंगा के तीन सगे भाई-बहनों ने कर दिखाया है, जिनकी प्रतिभा का शंखनाद अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने को तैयार है।
नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित 63वीं अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा के अंतर्गत, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में 11-12 फरवरी 2026 को बिहार-झारखंड राज्यस्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बेनीपुर प्रखंड के बेलौन गांव के रहने वाले तीन सगे भाई-बहनों ने अपनी मेधा का ऐसा परिचय दिया कि सब देखते रह गए। तीनों ने मिलकर कुल सात पुरस्कार अपने नाम किए और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए अपनी जगह पक्की कर ली।
इस प्रतिष्ठित शास्त्रीय स्पर्धा में इन बच्चों ने जो कमाल किया है, वह वाकई अद्भुत है। 16 वर्षीया सुप्रीता कुमारी ने अष्टाध्यायी कंठपाठ स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं उनकी छोटी बहन, 14 वर्षीया सर्वज्ञा कुमारी ने धातुरूप कंठपाठ स्पर्धा में प्रथम और शास्त्रीय स्फूर्ति स्पर्धा में तृतीय स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
Sanskrit Competition में भाई-बहनों की तिकड़ी ने लहराया परचम
पुरस्कारों की यह झड़ी यहीं नहीं रुकी। सबसे छोटे भाई, 11 वर्षीय सर्वोत्तम कुमार झा ने भी काव्य कंठपाठ स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। इन व्यक्तिगत जीतों के अलावा, इन तीनों भाई-बहनों, सुप्रीता, सर्वज्ञा और सर्वोत्तम, ने अक्षरश्लोकी स्पर्धा में भी क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के सभी पुरस्कारों पर कब्जा जमा लिया। इस तरह सात अलग-अलग विषयों में चयनित होकर इन भाई-बहनों ने राज्य स्तर पर अपनी सफलता का झंडा गाड़ दिया है।
उनकी यह सामूहिक सफलता अब पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गई है। यह केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बेनीपुर और दरभंगा क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
माता-पिता भी शिक्षा जगत की बड़ी हस्तियां
इन प्रतिभाशाली बच्चों की सफलता के पीछे उनके माता-पिता और गुरुजनों का मार्गदर्शन है। इनके पिता और मार्गदर्शक, डॉ. संतोष कुमार झा, बैगनी स्थित पूर्णिमा रामप्रताप संस्कृत महाविद्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत हैं और संस्कृत प्रचार-प्रसार विस्तार मंच के सहसंयोजक भी हैं।
वहीं, उनकी माता श्रीमती महाश्वेता (ट्रिपल एम.ए.) बहादुरपुर स्थित उत्क्रमित माध्यमिक उच्च विद्यालय, कमरौली में बीपीएससी द्वारा चयनित +2 की हिंदी शिक्षिका हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्पष्ट है कि घर में मिले शैक्षणिक और सांस्कृतिक माहौल ने बच्चों की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी दौरान, डॉ. झा के एक और शिष्य, महिनाम गांव के सुनील कुमार (पिता चिरंजीव झा) को भी ज्योतिष भाषण स्पर्धा में सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






