back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 14, 2026
spot_img

महाशिवरात्रि 2026: ब्रह्मा-विष्णु विवाद और शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग का रहस्य

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Mahashivratri 2026: प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पावन पर्व, भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में तो विख्यात है ही, किंतु इसके उद्भव से जुड़ी एक और अत्यंत महत्वपूर्ण कथा है जो सृष्टि के त्रिदेवों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश के गूढ़ संबंधों को दर्शाती है। यह कथा बताती है कि कैसे सृष्टि के रचयिता और पालनकर्ता के बीच हुए एक विवाद ने महादेव के विराट स्वरूप और उनके प्रथम ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य का मार्ग प्रशस्त किया।

- Advertisement -

महाशिवरात्रि 2026: ब्रह्मा-विष्णु विवाद और शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग का रहस्य

महाशिवरात्रि 2026: कैसे हुई इस पावन पर्व की शुरुआत?

यह उस समय की बात है जब सृष्टि के आरंभ को लेकर भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के मध्य यह विवाद छिड़ गया था कि कौन अधिक श्रेष्ठ है। ब्रह्मा जी स्वयं को सृष्टि का रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ मानते थे, तो वहीं भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में अपनी महत्ता सिद्ध कर रहे थे। दोनों देवों का यह विवाद इतना बढ़ गया कि संपूर्ण ब्रह्मांड में उथल-पुथल मच गई। इसी गंभीर परिस्थिति को शांत करने और अपनी परम सत्ता का बोध कराने के लिए, एक दिन एकाएक एक अग्निस्तंभ प्रकट हुआ, जो अनंत और असीम था। इसका न कोई आदि था और न कोई अंत। यह अग्निस्तंभ ही भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग स्वरूप था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

इस अद्भुत और तेजोमयी ज्योतिर्लिंग को देखकर ब्रह्मा जी और विष्णु जी दोनों ही अचंभित रह गए। उन्होंने यह तय किया कि जो भी इस स्तंभ का आदि या अंत सबसे पहले खोज निकालेगा, वही श्रेष्ठ कहलाएगा। तब भगवान ब्रह्मा हंस के रूप में उस स्तंभ का ऊपरी सिरा खोजने के लिए ऊपर की ओर उड़ चले, और भगवान विष्णु वराह का रूप धारण कर उसके निचले सिरे का पता लगाने के लिए पाताल लोक की ओर चले गए। हजारों वर्षों तक निरंतर यात्रा करने के बाद भी दोनों में से कोई भी उस स्तंभ का छोर नहीं ढूंढ पाया। जब ब्रह्मा जी को लगा कि वे सफल नहीं हो पाएंगे, तो उन्होंने एक केतकी के फूल को साक्षी बनाकर विष्णु जी से यह झूठ कहा कि उन्होंने स्तंभ का ऊपरी सिरा देख लिया है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  आज का पंचांग 13 फरवरी 2026: विजया एकादशी के शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

दूसरी ओर, भगवान विष्णु ने अपनी असफलता स्वीकार कर ली और विनम्रतापूर्वक लौट आए। तभी उस अग्निस्तंभ से स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए। महादेव ने ब्रह्मा जी के असत्य वचन पर उन्हें दंडित किया और कहा कि उनकी पूजा पृथ्वी पर कभी नहीं की जाएगी (कुछ मान्यताओं के अनुसार मंदिरों में उनकी पृथक पूजा नहीं होगी, जबकि सामूहिक रूप से वे पूजे जाते हैं)। वहीं, भगवान विष्णु की सत्यनिष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे युगों-युगों तक पूजनीय रहेंगे। इसी दिन भगवान शिव अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट हुए थे, और यह रात्रि महाशिवरात्रि कहलाई। यह घटना हमें अहंकार को त्याग कर सत्य और विनम्रता के मार्ग पर चलने का संदेश देती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें भगवान शिव के अनंत, अनादि और सर्वशक्तिमान स्वरूप की याद दिलाता है। यह वह पावन दिन है जब भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इस दिन शिव भक्त पूरी श्रद्धा से व्रत रखते हैं, शिव लिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हैं। भगवान शिव की आराधना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पवित्र अवसर पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

T20 World Cup 2026: क्या भारतीय क्रिकेट के लिए बन रहा है ऐतिहासिक संयोग?

T20 World Cup 2026: भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों में एक बार फिर उम्मीदों...

Rohit Shetty फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: पुणे से मुंबई तक ऐसे बिछाया गया था जाल!

Rohit Shetty News: बॉलीवुड के सिंघम डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग...

Free Fire MAX: 14 फरवरी को पाएं फ्री बंडल्स और स्किन्स!

Free Fire MAX: लोकप्रिय बैटल रॉयल गेम फ्री फायर मैक्स के शौकीनों के लिए...

Ramayana Movie: रणबीर कपूर की ‘रामायण’ होगी साल 2026 की सबसे बड़ी फिल्म, निर्माता ने खोला विजन का राज

Ramayana Movie: बड़े पर्दे पर भगवान राम की कहानी को दोबारा जीवंत करने का...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें