

Bihar SIM Card News: Bihar SIM Card News: आज की दुनिया में तकनीक की रोशनी जितनी तेज़ है, उसकी परछाई भी उतनी ही गहरी है। बिहार में मोबाइल सिम कार्ड के बढ़ते इस्तेमाल ने एक नई चिंता को जन्म दिया है, जहां मासूम हाथों में डिजिटल दुनिया की चाबी थमाई जा रही है।
बिहार में बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन: एक करोड़ ‘Bihar SIM Card News’ का चौंकाने वाला सच
बिहार में किशोरों के नाम पर सिम कार्ड लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो समाज और प्रशासन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल लगभग 7 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं। इन आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से करीब एक करोड़ सिम कार्ड 9 से 17 वर्ष की आयु के किशोरों के नाम पर सक्रिय हैं। यह आंकड़ा न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि कई अनसुलझे सवाल भी खड़े करता है कि आखिर इतनी कम उम्र में बच्चों के पास मोबाइल कनेक्शन कैसे पहुंच रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अभिभावकों और प्रशासन दोनों के लिए यह जानना जरूरी है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किस प्रकार हो रहा है और इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं।
बच्चों के लिए ‘Bihar SIM Card News’ क्यों बनी चुनौती?
कानून के मुताबिक, किसी भी नाबालिग को अपने नाम पर सिम कार्ड लेने की अनुमति नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि या तो अभिभावक अपने पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके बच्चों के नाम पर सिम ले रहे हैं, या फिर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया जा रहा है, जो एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। बच्चों के हाथ में बेरोकटोक इंटरनेट और मोबाइल पहुंच से उनकी डिजिटल सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। वे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अनुचित सामग्री के संपर्क में आने और यहां तक कि साइबर अपराधों में अनजाने में फंसने का शिकार हो सकते हैं। यह स्थिति बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कानूनी पेचीदगियां और अभिभावकों की भूमिका
मोबाइल कनेक्शन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है, क्योंकि इसी उम्र में व्यक्ति कानूनी रूप से करार करने के लिए पात्र होता है। ऐसे में 9 से 17 साल के बच्चों के नाम पर सिम कार्ड का होना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। टेलीकॉम ऑपरेटरों को ग्राहक सत्यापन (KYC) प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करना होता है, लेकिन इस मामले में यह स्पष्ट रूप से उल्लंघन हुआ प्रतीत होता है। अभिभावकों की इसमें अहम भूमिका है। वे शायद बच्चों की जिद या सुविधा के लिए ऐसा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इसके दीर्घकालिक और गंभीर परिणामों के बारे में सोचना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई बार इन सिम कार्ड का इस्तेमाल छोटे-मोटे अपराधों, ब्लैकमेलिंग या असामाजिक गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है, जिसका खामियाजा बच्चों और परिवार दोनों को भुगतना पड़ सकता है।
सरकार और दूरसंचार कंपनियों को इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। जन जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को इस खतरे से आगाह करना चाहिए। साथ ही, सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने की जरूरत है ताकि नाबालिगों के नाम पर सिम कार्ड जारी न हो सकें। बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उनकी डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम उन्हें तकनीक के नकारात्मक प्रभावों से बचाएं और एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की शिक्षा दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



